कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में प्रमुख नक्सली कमांडर मल्लेश ने आत्मसमर्पण कर दिया है। वह कुछ स्थानीय ग्रामीणों के साथ छोटेबेठिया में स्थित बीएसएफ के कैंप पर पहुंचा और वहां मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों के सामने सरेंडर किया। उसके पास एके-47 राइफल भी थी, जिसे उसने जमा कर दिया।
मल्लेश ने बताया कि ग्रामीणों की सलाह और समझाने पर उसने यह कदम उठाया। अब वह नक्सल जीवन छोड़कर सामान्य समाज में वापस लौटना चाहता है। बस्तर क्षेत्र, खासकर कांकेर में वह लंबे समय से एक जाना-माना और प्रभावशाली नक्सली नेता माना जाता था। वह डीवीसीएम (डिविजनल कमेटी मेंबर) रैंक पर था।
कांकेर के एसपी निखिल राखेचा और बीएसएफ अधिकारियों के समन्वित प्रयासों से यह सरेंडर संभव हो सका। नारायणपुर पुलिस की निरंतर तलाशी और दबाव ने भी इसमें भूमिका निभाई। कुछ दिन पहले ही मल्लेश ने ग्रामीणों से अपनी इच्छा जाहिर की थी, जिसके बाद उसकी सरेंडर प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।
यह आत्मसमर्पण बीएसएफ की 94वीं वाहिनी के कमांडर राघवेंद्र सिंह की मौजूदगी में हुआ। सुरक्षा बलों ने इसे क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी उपलब्धि करार दिया है। उनका कहना है कि कांकेर में लगातार चलाए जा रहे शांति स्थापना और नक्सल उन्मूलन अभियानों से काफी संख्या में नक्सली प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में बाकी बचे नक्सली भी हथियार डाल सकते हैं।
वर्तमान में उत्तर बस्तर कांकेर जिले में मात्र 23 नक्सली ही सक्रिय बताए जा रहे हैं। सुरक्षा बलों की ओर से उन्हें भी सरेंडर करने की अपील की जा रही है। यदि वे नहीं मानते, तो उनके खिलाफ सर्च ऑपरेशन तेज किए जा सकते हैं। मल्लेश के इस कदम से अन्य बचे हुए नक्सलियों पर भी मुख्यधारा में आने का दबाव बढ़ सकता है।









