सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद ध्वस्त, प्रशासन ने बताया अवैध निर्माण; समिति ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर (Saharanpur)में कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर बनी एक मस्जिद को शनिवार सुबह प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। प्रशासन के अनुसार, यह मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी अनधिकृत संरचना थी। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।

यह कार्रवाई 2 सितंबर को स्थानीय अदालत के उस फैसले के बाद हुई, जिसमें मस्जिद प्रबंधन समिति की याचिका खारिज कर दी गई थी। समिति ने सिटी मजिस्ट्रेट के जुलाई में दिए उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मस्जिद को अनधिकृत बताते हुए परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया था।

अदालत में अपील खारिज होने के बाद कार्रवाई

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सहारनपुर के सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने जुलाई में मस्जिद को खाली कराने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ दायर अपील को अदालत ने 2 सितंबर को खारिज कर दिया। इसके बाद शनिवार को मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया।

सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह ने भी कहा कि कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण माना था। मस्जिद समिति की ओर से की गई अपील भी खारिज हो गई थी।

मस्जिद के मुतवल्ली ने उठाए सवाल

मस्जिद के मुतवल्ली तनवीर अहमद ने कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मस्जिद करीब 150 साल पुरानी है और उसे गिराने का कोई अलग आदेश नहीं दिया गया था।

तनवीर अहमद के मुताबिक, सिटी मजिस्ट्रेट ने जुलाई में परिसर खाली करने के लिए 30 दिन का समय दिया था। इस आदेश को जिला जज की अदालत में चुनौती दी गई, लेकिन 2 सितंबर को याचिका खारिज हो गई।

उनका दावा है कि अदालत में मामला लंबित रहने की अवधि को 30 दिन की समयसीमा में नहीं गिना जाना चाहिए था। उनका कहना है कि मस्जिद समिति अब इस कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख करेगी।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद कलेक्ट्रेट परिसर में करीब 315 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद को लेकर है। प्रशासन ने जुलाई में इसे अनधिकृत निर्माण घोषित किया था और परिसर खाली करने का आदेश दिया था।

मामले में कथित तौर पर अनधिकृत कब्जे के लिए 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1972 के तहत की गई थी।

प्रशासन के अनुसार, राजस्व विभाग की जांच के बाद यह कार्रवाई शुरू हुई। जांच एक शिकायत के आधार पर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है।

मार्च 2025 में एक राजस्व अधिकारी ने मस्जिद के कथित प्रबंधक और मौलवी अब्दुल हमीद के खिलाफ सरकारी संपत्ति पर अनधिकृत कब्जे की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद अप्रैल में नोटिस जारी किए गए और जून में पक्षकारों की ओर से आपत्तियां दाखिल की गई थीं।

सपा सांसद इकरा हसन ने लगाया नजरबंद करने का आरोप

मस्जिद गिराए जाने से पहले कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उन्हें उनके घर पर नजरबंद कर दिया गया, ताकि वे सहारनपुर न जा सकें।

समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से उन्होंने कहा कि उनके घर के बाहर रातभर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे। उनका कहना था कि वे सहारनपुर जाकर अधिकारियों से मिलना चाहती थीं, लेकिन उन्हें घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई।

कांग्रेस ने कार्रवाई को बताया ‘ब्लैक डे’

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मस्जिद गिराए जाने को सहारनपुर के लिए ‘ब्लैक डे’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को उनके घरों में रोककर मस्जिद को गिराया गया।

मसूद ने दावा किया कि मस्जिद 1911 से भी पहले की है और इसके निर्माण से जुड़े लोगों के नाम पुराने रिकॉर्ड में दर्ज हैं। उन्होंने कार्रवाई की कानूनी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और कहा कि इस मामले को आगे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाएगा।

विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता धर्मेंद्र कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार अदालतों के आदेशों पर तुरंत ऐसी कार्रवाई करती है, जिससे समाज में तनाव और नफरत बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि न्याय पाने के लिए सभी पक्षों को अदालतों में अपील का अधिकार मिलना चाहिए।

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उत्तर प्रदेश में मस्जिदों को जल्दबाजी में अवैध घोषित कर गिराए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाया। उन्होंने इसे उचित नहीं बताया।

फिलहाल प्रशासन का कहना है कि मस्जिद को सरकारी जमीन पर अनधिकृत निर्माण पाए जाने और अदालत में अपील खारिज होने के बाद हटाया गया है। वहीं, मस्जिद प्रबंधन और विपक्षी दल कार्रवाई की प्रक्रिया और मस्जिद की पुरानियत को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

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