लेंस डेस्क। डॉक्टर बनने का सपना, परिवार की उम्मीदें और वर्षों की मेहनत… लेकिन NEET पेपर लीक विवाद ने एक और होनहार छात्रा की जिंदगी छीन ली। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की रहने वाली आकांक्षा चतुर्वेदी ने नागपुर में आत्महत्या कर ली। अपने सुसाइड नोट में उसने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा, ‘मम्मी-पापा, आपको भरोसा था कि मैं डॉक्टर बनूंगी, लेकिन मुझमें दोबारा परीक्षा देने की हिम्मत नहीं है।’ नीट पेपर लीक और फिर रद्द होने के बाद यह छठवीं खुदकुशी है।
आकांक्षा नागपुर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी कर रही थी। परिजनों के मुताबिक, परीक्षा देने के बाद वह बेहद खुश थी और उसे भरोसा था कि इस बार उसके 650 से अधिक अंक आएंगे। लेकिन पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की चर्चाओं के बाद वह गहरे तनाव में चली गई।
परिवार का कहना है कि धीरे-धीरे उसने खाना-पीना कम कर दिया, लोगों से बातचीत बंद कर दी और खुद को कमरे में सीमित कर लिया। 31 मई की रात उसने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चौबे किसान हैं। बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए कर्ज लिया था। परिवार के अनुसार, पढ़ाई और कोचिंग पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे। अब वही सपना एक दर्दनाक त्रासदी में बदल गया है।
आकांक्षा के दादा जगदीश चतुर्वेदी ने बताया कि परीक्षा के बाद वह बेहद उत्साहित थी। वह लगातार कह रही थी कि इस बार उसका चयन तय है। लेकिन जैसे ही पेपर लीक की खबरें सामने आईं, उसका व्यवहार पूरी तरह बदल गया। परिवार के मुताबिक, वह मानसिक रूप से टूट चुकी थी।
इस घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों ने परीक्षा प्रणाली और सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने परिवार से बात कर सहायता का आश्वासन दिया, जबकि युवा कांग्रेस और NSUI के प्रतिनिधि भी परिवार से मिलने पहुंचे। NSUI ने आर्थिक सहायता देने और परिवार के कर्ज को चुकाने में मदद का वादा किया है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा, वहीं आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में फैली अव्यवस्था की कीमत छात्र अपनी जान देकर चुका रहे हैं।
आकांक्षा की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में होने वाली कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं की कीमत आखिर कब तक छात्रों को चुकानी पड़ेगी। एक छात्रा का आखिरी खत अब सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि लाखों प्रतियोगी छात्रों की चिंता और असुरक्षा का प्रतीक बन गया है।
आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत ने एक बार फिर उस दर्दनाक सवाल को सामने ला दिया है, जो NEET पेपर लीक विवाद के बाद लगातार उठ रहा है।
परीक्षा रद्द होने और पेपर लीक विवाद के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में अब तक आधा दर्जन ने ज्यादा छात्र-छात्राएं आत्महत्या कर चुके हैं। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गोवा में छात्रों की मौत के मामले पहले ही सुर्खियों में आ चुके थे। वहीं दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक से भी ऐसे मामले सामने आए, जहां परिवारों ने परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों के गहरे मानसिक तनाव में चले जाने की बात कही।
13 मई को गोवा के मडगांव में एक छात्र ने सुसाइड कर लिया। उसने सुसाइड नोट में लिखा कि वह अब प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा नहीं लेना चाहता।
14 मई को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में छात्र रितिक मिश्रा ने जान दे दी। परिवार के मुताबिक वह पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से परेशान था।
15 मई को दिल्ली के आजादपुर में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली।
15 मई को ही राजस्थान में छात्र प्रदीप मेघवाल ने भी सुसाइड कर लिया। परिवार ने बताया कि उसे करीब 650 अंक आने की उम्मीद थी।
24 मई अब कर्नाटक केे कुलबर्गी की भाग्यश्री ने खुदकुशी की थी।
ऐसे में आकांक्षा का आखिरी खत केवल एक बेटी की विदाई नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर भी सवाल है जिसके फैसलों का बोझ लाखों छात्रों के कंधों पर पड़ता है। डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली यह छात्रा अब एक ऐसी बहस का चेहरा बन गई है, जो परीक्षा की निष्पक्षता, जवाबदेही और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी है।









