अजित डोभाल के किस बयान पर भड़कीं महबूबा मुफ्ती? कह दी ये बात…

January 14, 2026 2:14 PM
Mehbooba Mufti on Ajit Dova

लेंस डेस्‍क। Mehbooba Mufti on Ajit Doval: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के हालिया बयान पर सियासी घमासन मचा है। उनका वह बयान चर्चा में है, जिसमें उन्‍होंने कहा था कि “इतिहास हमें एक चुनौती देता है। हर युवक के अंदर वो आग होनी चाहिए। प्रतिशोध शब्द अच्छा तो नहीं है, लेकिन प्रतिशोध भी अपने आप में बड़ी भारी शक्ति होती है। हमें अपने इतिहास का प्रतिशोध लेना है।”

डोभाल के इस बयान की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे बेहद खेदजनक करार दिया और कहा कि एक इतने उच्च पद पर बैठे अधिकारी, जिनकी मुख्य जिम्मेदारी देश को आंतरिक व बाहरी खतरों से सुरक्षित रखना है, डोभाल ने घृणा फैलाने वाली सांप्रदायिक सोच को अपनाकर मुसलमानों के खिलाफ हिंसा को स्वीकार्य बनाने जैसा रवैया दिखाया है।

महबूबा मुफ्ती ने आगे कहा कि पुरानी सदियों पुरानी घटनाओं का बदला 21वीं सदी में लेने की बात करना महज एक छिपा हुआ संकेत (डॉग व्हिसल) है। यह गरीब और कम पढ़े-लिखे युवाओं को उकसाता है कि वे उस अल्पसंख्यक समुदाय पर हमला करें, जो पहले से ही हर ओर से चुनौतियों और हमलों का सामना कर रहा है।

वहीं कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. शमा मोहम्मद ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, जिनकी मुख्य जिम्मेदारी देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, वह इसके विपरीत युवाओं को पुराने इतिहास का बदला लेने के लिए भड़का रहे हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि पुलवामा और पहलगाम जैसे हमलों के जिम्मेदार आतंकवादी अभी तक कहाँ हैं? दिल्ली में हुए विस्फोट के पीछे कौन था? साथ ही उन्होंने कई अन्य घटनाओं में खुफिया तंत्र की नाकामी के लिए डोभाल को जिम्मेदार ठहराया और माँग की कि उन्हें इस्तीफा देकर घर बैठ जाना चाहिए।

डोभालने क्‍या कहा था?

अजित डोभाल के ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग-2026’ में दिए गए संबोधन के जवाब में आई है। डोभाल ने वहां युवाओं से कहा था कि आज का स्वतंत्र भारत हमेशा ऐसा नहीं रहा। पूर्वजों ने आजादी के लिए भारी कुर्बानियां दीं, अपमान सहे, असहायता के दौर झेले भगत सिंह को फांसी हुई, सुभाष चंद्र बोस को आजीवन संघर्ष करना पड़ा, महात्मा गांधी को सत्याग्रह करना पड़ा और असंख्य लोगों ने जान गंवाई।

उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी सभ्यता बहुत उन्नत थी। हमने कभी किसी के मंदिर नहीं तोड़े, लूटपाट नहीं की, न ही कमजोर दुनिया पर हमला किया। लेकिन सुरक्षा के खतरों को नजरअंदाज करने की वजह से इतिहास ने हमें कड़ा सबक सिखाया। सवाल है कि क्या हमने वह सबक सीखा? क्या हम उसे याद रखेंगे? अगर आने वाली पीढ़ियां इसे भूल गईं, तो देश के लिए यह सबसे बड़ी आपदा होगी।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now