धमतरी। जिले के कलेक्ट्रेट मार्ग पर सोमवार को 45 गांवों के हजारों आदिवासियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पुल-पुलिया, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन (Tribal protest) किया। किसान संघर्ष समिति एवं जल-जंगल-जमीन संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन में बड़ी संख्या में ग्रामीण धमतरी कलेक्ट्रेट घेराव के लिए पहुंचे।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी उनके गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। कई गांवों में आज तक पक्की सड़क, पुल-पुलिया, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल, बिजली और शुद्ध पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर कई बार शासन-प्रशासन को ज्ञापन और आवेदन सौंपे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह सतर्क रहा। धमतरी के अलावा गरियाबंद एवं आसपास के जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के क्षेत्रों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई तथा जगह-जगह बैरिकेडिंग कर आवागमन नियंत्रित किया गया।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। हालांकि इसके बावजूद आंदोलनकारियों का हौसला नहीं टूटा और वे अपनी मांगों को लेकर डटे रहे।
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीण महिला गौरी नाग ने बताया कि जंगल क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के कारण गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और गंभीर मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए कीचड़ भरे और कच्चे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे अनिश्चितकालीन धरना जारी रखते हुए कलेक्ट्रेट का घेराव जारी रखेंगे। उनका कहना है कि जब तक गांवों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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