बस्तर। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) में इन दिनों उथल – पुथल मची हुई है। पार्टी की एक कमेटी संघर्ष विराम की बात कर रही है तो वहीं एक कमेटी अभी भी मारे गए माओवादियों (Maoists) के मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए बंद का आह्वान कर रहे हैं। आज नक्सल मोर्चे के दो प्रवक्ता द्वारा अलग – अलग प्रेस विज्ञप्ति जारी किया गया है।
इसमें सबसे अहम माओवादी पार्टी के महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ स्पेशल जोनल कमिटी के प्रवक्ता अनंत का प्रेस नोट है। प्रेस नोट में अनंत ने ऐलान किया है कि एमएमसी स्पेशल जोनल कमिटी के माओवादी 1 जनवरी को एक साथ सरेंडर करेंगे और छत्तीसगढ़ सरकार के पूना मार्गेम को स्वीकार करेंगे।
पढ़ें एमएमसी स्पेशल जोन कमेटी की जारी पूरी प्रेस नोट

प्रेस नोट में अनंत ने कहा कि उन्होंने सशस्त्र संघर्ष को अस्थाई रूप से विराम देते हुए समाज के मुख्य धारा में जुड़कर जनता के बीच जाकर काम करने का फैसला लिया गया है।
प्रेस नोट में लिखा है कि यह क्रांति के साथ धोखा और जनता के साथ विश्वासघात नहीं है। हथियार छोड़ देना मतलब गद्दारी नहीं होता।
अनंत ने आगे अपने नक्सल संगठन के साथियों से अपील की है कि कठिन परिस्थिति में धैर्य ना खोये। अकेले -अकेले जाकर आत्मसमर्पण ना करें। हम सब एक साथ सामूहिक रूप से 1 जनवरी 2026 को हथियार छोड़कर पूना मार्गेम स्वीकार करेंगे।
हिडमा का फर्जी एनकाउंटर, 30 नवंबर को दंडकारण्य और छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान
एक और प्रेस नोट दंडकारन्य स्पेशल जोनल कमिटी के प्रवक्ता विकल्प ने जारी किया है। यह प्रेस नोट 22 नवंबर का है।
इस प्रेस नोट में 18 व 19 नवम्बर को आंध्रप्रदेश के मराडमल्ली में हुई मुठभेड़ को फर्जी करार दिया गया है। इसमें दो नक्सली कमांडर माडवी हिड़मा और टेक शंकर सहित कुल 13 माओवादियों की मौत हुई थी।
अब पढ़ें दण्यकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का प्रेस नोट


विकल्प ने इस मुठभेड़ को फर्जी करार देते हुए 30 नवम्बर को दण्डकारण और छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया है।
प्रेस नोट में बताया गया कि नक्सल नेता देवजी सहित 50 अन्य नक्सलियों को अलग – अलग जगहों में गिरफ्तार किया गया है। प्रेस नोट में उन्हें न्यायालय मे पेश करवाने के उल्लेख किया। विज्ञप्ति में कामरेड राजू दादा और कोसा दादा के मुठभेड़ को भी फर्जी बताया।
प्रेस नोट में विकल्प ने लिखा है कि समस्त दण्डकारण क्षेत्र में अन्याय पूर्ण तरीके से सरकार युद्ध की स्थिति बना रही है। साथ ही साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का घोर उलंघन हो रहा है। यह सब जल-जंगल-जमीन को लूटने और कॉर्पोरेट कंपनियों को खोलने के उद्देश्य से हो रहा है।
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