‘असली आतंकी को पहचानो’ इस बयान से विवादों में घिरी प्रोफेसर

April 28, 2025 10:47 PM
Madri Kakoti

द लेंस डेस्क। पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को गुस्से में ला दिया है। इस बीच लखनऊ यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. माद्री काकोटी Madri Kakoti का एक वीडियो पाकिस्तान में वायरल हो गया है। इस वीडियो में उन्होंने भारत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि धर्म के नाम पर भेदभाव भी आतंकवाद है। उनके इस बयान ने भारत में हंगामा मचा दिया है। लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्र उन पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की आजादी का मुद्दा बता रहे हैं।

क्या कहा प्रोफेसर माद्री काकोटी ने?

डॉ. माद्री काकोटी ने अपने वीडियो में सरकार की नीतियों पर तंज कसा। उन्होंने कहा “धर्म पूछकर गोली मारना आतंकवाद है। लेकिन धर्म के नाम पर किसी को मारना, नौकरी से निकालना, घर न देना या बुलडोजर चलाना भी आतंकवाद है। असली आतंकवाद को समझो।” यह वीडियो पाकिस्तान के सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है जिसके बाद भारत में भी इस पर बहस शुरू हो गई है।

उन्होंने वीडियो में यह भी कहा, “पहलगाम में 27 आम लोग मारे गए। ये आप और मेरे जैसे लोग थे। इतनी बड़ी घटना हो गई लेकिन मीडिया टीआरपी बटोरने में व्यस्त रहा। सरकार से कोई सवाल नहीं पूछा गया। देश की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक हुई लेकिन गृह मंत्री को कुछ पता ही नहीं।”

छात्रों में गुस्सा, कार्रवाई की मांग

लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्र माद्री काकोटी के बयान से नाराज हैं। उनका कहना है कि पहलगाम हमले जैसे गंभीर मुद्दे पर ऐसा बयान देना ठीक नहीं है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) जैसे छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से माद्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। कुछ छात्रों ने इसे देश की एकता के खिलाफ बताया है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर लोग दो गुटों में बंट गए हैं।

कौन हैं डॉ. माद्री काकोटी?

डॉ. माद्री काकोटी लखनऊ यूनिवर्सिटी के भाषा विज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। सोशल मीडिया पर वह ‘डॉ. मेडुसा’ के नाम से जानी जाती हैं। असम की रहने वाली माद्री अक्सर अपने व्यंग्यात्मक अंदाज में सरकार की आलोचना करती हैं। उनकी पोस्ट और वीडियो सामाजिक मुद्दों पर चर्चा छेड़ते हैं। लेकिन इस बार उनके बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

नेहा राठौर का मामला भी जुड़ा

इस विवाद ने नेहा राठौर जैसे मामलों को भी याद दिलाया है। भोजपुरी गायिका नेहा राठौर ने अपने गानों के जरिए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद उन्हें कानूनी नोटिस और आलोचना का सामना करना पड़ा था। नेहा ने अपने गानों में सामाजिक मुद्दों को व्यंग्य के जरिए पेश किया लेकिन कई बार उनके गाने विवादों में घिर गए। माद्री काकोटी का मामला भी कुछ ऐसा ही है जहां अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर उनके बयान को कुछ लोग समर्थन और कुछ लोग देश के खिलाफ बता रहे हैं। दोनों मामलों ने यह सवाल उठाया है कि अभिव्यक्ति की आजादी की सीमा क्या होनी चाहिए?

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