Lens Exclusive: छत्तीसगढ़ में वही पुराना खेल जारी है जहां किसान धान उगाकर देश का पेट भरते हैं, वहीं सरकार और बड़ी कंपनियां मिलकर उसी जमीन को खदान का कटोरा बनाने पर तुली हुई हैं इस बार निशाने पर हैं छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से तकरीबन 150 किमी दूर बालोद जिले के डोंडी लोहारा क्षेत्र के दो गांव सेम्हरडीह और रायपुरा। यहां फास्फोरस और लाइमस्टोन मिलने की पुष्टि हुई और NLC India Limited नाम की दिग्गज MNC को पहले ही नीलामी में ब्लॉक आवंटित कर दिए गए। अब गांववालों को हटाने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जा सकती है, यानी की ग्राम सभा के नाम पर फर्जीवाड़ा का खेल छत्तीसगढ़ में जारी है और वो कैसे, देखिये द लेंस के इस ग्राउंड रिपोर्ट में
दरअसल बालोद ज़िले के डौंडीलोहारा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 2 गाँव सेम्हरडीह–रायपुरा में फास्फोरस और लाइमस्टोन खनिज मिलने की पुष्टि हुई है, और इसके बाद NLC India Limited को इन दोनों ब्लॉकों का संयुक्त लाइसेंस दे दिया गया है, इधर गांववाले इसे अपने घर-जमीन और भविष्य पर हमला मान रहे हैं, द लेंस टीम ने देर शाम रायपुरा गाँव पहुंचकर जब लोगों से बात करनी शुरू की तो लोगों में बेचैनी साफ़ साफ़ दिखाई दी।
गांव में माहौल बेहद तनावपूर्ण था, खासकर महिलाएं खुलकर विरोध कर रही हैं, वे कह रही हैं ये “हमारी जमीन, हमारे जंगल हमारे घर और हमारे बच्चों का भविष्य अब सब लुट जाएगा। पुरुष वर्ग भी गुस्से में है, लेकिन कई पुरुष 10 फीसदी ज्यादा मुआवजे देने की बात कर रहे हैं। एक 75 साल के बुजुर्ग ने रुंधे गले से बताया, 1 दिन पहले ही मेहनत की कमाई से करोड़ों का घर बनाया है, मेरी पत्नी आंखों से नहीं देख पाती लेकिन अब यह घर भी छिन जाएगा। हम कहां जाएंगे?’ उनकी आवाज़ में टीस थी, गुस्सा था और बेबसी भी।
अब आप सरकारी पत्र और फर्जीवाड़े के खेल को समझिये –
10 अप्रैल को केंद्रीय खनिज मंत्रालय ने खदान की नीलामी कर दी, 28 अप्रैल 2026 को डोंडी लोहारा के नायब तहसीलदार ने दोनों गांवों के सरपंचों को पत्र लिखा। पत्र में साफ-साफ आदेश था – ग्राम सभा बुलाओ, अनापत्ति दर्ज करो लेकिन गाँव ने आपत्ति दर्ज करायी लेकिन असलियत यह है कि कंपनी को पहले ही लाइसेंस दे दिया गया था। ठीक दो दिन बाद, 30 अप्रैल को छत्तीसगढ़ खनिज साधन विभाग ने भी जिला प्रशासन को पत्र लिखकर प्रक्रिया तेज करने को कहा। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि गांववालों की आपत्ति दर्ज होने के बावजूद कंपनी को लाइसेंस मिल गया। 1 जून 2026 को NLCIL ने छत्तीसगढ़ सरकार के साथ प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस के डीड भी एक्जीक्यूट कर लिए अब बोर ड्रिलिंग की तैयारी चल रही है।
लेकिन इस बीच गाँव के सरपंच का बयान और भी सवाल खड़े करता है, रायपुरा और सेम्हरडीह के ग्राम पंचायत सरपंच डेविड बारले ने द लेंस को बताया कि उन्हें जब ये पत्र मिला तो पहले तो इसे 15 दिनों तक गंभीरता से नहीं लिया बाद में राजस्व विभाग से फोन आया तो ग्राम सभा बुलाई गई। गांववालों ने एकमत से आपत्ति पत्र दे दिया। सरपंच का कहना है, कि हमने साफ लिख दिया हम अपनी जमीन नहीं देंगे।” लेकिन उनके बयान से एक सवाल और खड़ा होता है, गांववालों ने आपत्ति दर्ज कर दी थी, तब जिस समय हम ग्राउंड रिपोर्ट कर रहे थे ठीक उसी दिन NLCIL ने अपने सोशल मीडिया पर घोषणा कैसे कर रही थी कि लाइसेंस मिल गया है ? NLC India Limited ने अपने आधिकारिक बयान में दावा किया है कि उसने मई में केंद्र सरकार की ट्रांच-V नीलामी में दोनों ब्लॉक जीते।
द लेंस की ग्राउंड रिपोर्ट में एक बात साफ नजर आई गांववाले अब डर और गुस्से के बीच जी रहे हैं। ज्यादातर लोग जमीन नहीं छोड़ना चाहते। ज़ाहिर है ज़मीन से उखाड़ने का दर्द यहाँ महसूस किया जा सकता है, छत्तीसगढ़ में बार-बार यह कहानी दोहराई जा रही है और अब बालोद के ये दो गांव अब इस लड़ाई का नया केंद्र बन गए हैं। किसान अपनी पुरखों की जमीन बचाने के लिए तैयार बैठे हैं जबकि सरकार और कंपनी राष्ट्रीय विकास का राग अलाप रही है। अब देखना यह है कि कानून, लोकतंत्र और ग्राम सभा का पाखंड कब तक चलेगा ?









