नई दिल्ली। कर्नाटक के गृह मंत्री Priyank Kharge ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत को एक औपचारिक पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति और आय के स्रोतों का स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने आरएसएस से अधिकृत पदाधिकारियों को नियुक्त कर अपनी कार्यप्रणाली के कानूनी आधारों को समझाने को कहा है।
पत्र में प्रियंक खड़गे ने आरएसएस से आग्रह किया है कि वे अपनी कानूनी स्थिति, दान के स्रोत, आयकर भुगतान, कार्यक्रमों की अनुमति आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दें। उन्होंने तर्क दिया कि देशभर में लगभग 90,000 शाखाओं और लाखों सदस्यों वाला यह संगठन एनजीओ या कंपनियों जैसी जवाबदेही का पालन करे। पत्र के निम्न सवाल किए गए हैं –
- आरएसएस किस कानून के तहत कार्य करता है और पंजीकरण से छूट का आधार क्या है?
- गुरुदक्षिणा (दान) के स्रोत क्या हैं?
- आयकर का भुगतान किया जाता है या नहीं?
- बड़े कार्यक्रमों और सार्वजनिक स्थानों के उपयोग की अनुमति कैसे ली जाती है?
- संगठन की वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
प्रियंक खड़गे ने आरएसएस मुख्यालय केशव कृपा या जगन्नाथ भवन आने का निमंत्रण देने को कहा है या भागवत से उनके कार्यालय में मिलने का प्रस्ताव रखा है, ताकि दस्तावेज देखकर कानूनी स्थिति स्पष्ट की जा सके।
उन्होंने कहा है कि अगर उनकी समझ गलत है तो वे माफी मांग लेंगे, अन्यथा संगठन को सुधार करना चाहिए।यह पत्र आरएसएस के बड़े पैमाने पर चल रही शाखाओं से जिनमें कर्नाटक में 4,127 दैनिक भी शामिल हैं। जवाबदेही की मांग करता है।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पहले कहा था कि आरएसएस ‘व्यक्तियों का समूह’ है, जिसे अदालत और इनकम टैक्स विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त है। गुरुदक्षिणा पर इनकम टैक्स से छूट मिली हुई है।
प्रियांक खड़गे लगातार इस स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं और कह रहे हैं कि देश में सड़क विक्रेता से लेकर मंदिर तक सबको रजिस्ट्रेशन और अकाउंट देना पड़ता है, तो आरएसएस को छूट कैसे मिल सकती है?









