नई दिल्ली। JNU Protest: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। 5 जनवरी की रात को साबरमती हॉस्टल के पास छात्रों के एक समूह ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी पूर्व छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के खिलाफ था।
प्रदर्शनकारियों ने न्याय और रिहाई की मांग करते हुए नारे लगाए, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ तीखे शब्द शामिल थे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में “मोदी-शाह तेरी कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर” जैसे नारे सुनाई दे रहे हैं।

जेएनयू प्रशासन ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया है। विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने वसंत कुंज थाने को पत्र लिखकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि ये नारे लोक व्यवस्था को बिगाड़ने वाले हैं, विश्वविद्यालय के आचार संहिता का उल्लंघन करते हैं और जानबूझकर लगाए गए थे, जो शांतिपूर्ण अकादमिक माहौल को नुकसान पहुंचाते हैं। प्रशासन ने कुछ छात्रों की पहचान कर दिल्ली पुलिस को शिकायत सौंपी है। घटना में करीब 30-35 छात्र शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं ठुकरा दीं, जबकि अन्य पांच आरोपियों को राहत दी। कोर्ट ने कहा कि दोनों की भूमिका योजना बनाने और निर्देश देने वाली थी, इसलिए वे अलग श्रेणी में आते हैं। अब ये दोनों एक साल तक नई जमानत अर्जी नहीं दाखिल कर सकते।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने इस नारेबाजी की कड़ी निंदा की और इसे राष्ट्र की एकता के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि देश तोड़ने की कोशिश करने वालों की जमानत खारिज होना सही फैसला है और ऐसे तत्वों से कोई समझौता नहीं होगा।
जनता दल (यूनाइटेड) के नेता केसी त्यागी ने भी इस नारेबाजी को अनुचित ठहराया। उन्होंने कहा कि जमानत खारिज होना न्यायिक निर्णय है और प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री को इसमें घसीटना गलत है। अदालती फैसलों पर नकारात्मक टिप्पणी की कोई परंपरा नहीं है, इसलिए संबंधित लोगों को इसे स्वीकार कर लेना चाहिए।
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता उदित राज ने इन नारों को छात्रों का गुस्सा जताने का तरीका बताया और इसे बड़ी बात नहीं माना। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विभिन्न तरह के नारे लगते रहते हैं और इनका शाब्दिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन में लगे सभी नारे वैचारिक थे, किसी व्यक्ति विशेष पर हमला नहीं थे और उन्हें लक्ष्य करके नहीं लगाए गए।









