नई दिल्ली। प्रसिद्ध विकास अर्थशास्त्री और कल्याणकारी अर्थशास्त्री जीन ड्रेज़ (Jean Drèze) को गरीबी और असमानता पर उनके उल्लेखनीय शोध के लिए ग्लोबल इनइक्वालिटी रिसर्च अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार 5 जून 2026 को पेरिस स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में आयोजित वर्ल्ड इनइक्वालिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया गया।
जीन ड्रेज़ बेल्जियम में जन्मे भारतीय विकास अर्थशास्त्री हैं। वे कई वर्षों से भारत में गरीबी, असमानता, भूख और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गहन शोध कर रहे हैं। वे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) जैसे महत्वपूर्ण कानूनों के मजबूत समर्थक रहे हैं।जूरी ने जीन ड्रेज़ को भारत में गरीबी और असमानता मापने के उनके शोध तथा सामाजिक सुरक्षा नीतियों के लिए वकालत के लिए चुना। पुरस्कार समिति ने कहा कि ड्रेज़ ने शोध को वास्तविक कार्य और लोगों के आंदोलनों से जोड़कर एक अनोखा उदाहरण पेश किया है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद जीन ड्रेज़ ने कहा, ‘यह सम्मान अकेले मेरा नहीं है। मैंने जो भी काम किया है, वह लोगों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर किया है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘भारत में आर्थिक असमानता के साथ-साथ जाति, लिंग, शिक्षा जैसी कई तरह की असमानताएं मौजूद हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत में असमानता के खिलाफ लंबा प्रतिरोध का इतिहास भी है। मुझे इन आंदोलनों से जुड़ने का मौका मिला, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है।’
ग्लोबल इनइक्वालिटी रिसर्च अवॉर्ड हर दो साल में दिया जाता है। यह उन शोधकर्ताओं को दिया जाता है जिन्होंने दुनिया भर में असमानता को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो। यह पुरस्कार का दूसरा संस्करण है। पहला पुरस्कार 2024 में बीना अग्रवाल और जेम्स के. बोइस को संयुक्त रूप से दिया गया था जीन ड्रेज़ लंबे समय से सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता पर नजर रखते रहे हैं। हाल के वर्षों में उन्होंने MGNREGA में बदलावों का विरोध किया है और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में आधार लिंकिंग से जुड़ी समस्याओं को उठाया है। वे हमेशा गरीबों और वंचितों के अधिकारों की बात करते रहे हैं।










