रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध प्रवासियों और धर्मांतरण के मामलों में कड़ी कार्रवाई करते हुए कानून-व्यवस्था को लेकर अपना सख्त रुख स्पष्ट किया है। उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा (Vijay Sharma) ने नया रायपुर स्थित संवाद ऑडिटोरियम में गृह एवं जेल विभाग की उपलब्धियों और आगामी रणनीतियों पर पत्रकारों से विस्तार से चर्चा की।
गृह मंत्री ने कहा कि राज्य में कानून का शासन सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि राज्य गठन के बाद 23 वर्षों में कुल 38 एफआईआर धर्मांतरण से जुड़े मामलों में दर्ज हुई थीं, जबकि पिछले दो वर्षों 2024 और 2025 में ही 67 एफआईआर दर्ज की गई हैं।
उन्होंने कहा कि अवैध धर्मांतरण में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है और आगे भी यह अभियान जारी रहेगा। जल्द ही धर्मांतरण को लेकर सरकार कानून बनाएगी।
गृह मंत्री ने बताया कि राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों की पहचान कर उनके विरुद्ध विशेष अभियान चलाया गया है। इसके लिए विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया गया।
अभियान के तहत 10 एफआईआर दर्ज कर 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही 34 लोगों को क्विट इंडिया ऑर्डर के तहत देश से बाहर निकाला गया।
उन्होंने कहा कि विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
नार्कोटिक्स में SAFEMA की कार्रवाई में प्रॉपर्टी अटैच, एटीएस थाने में FIR 2025 में
नशे के कारोबार पर प्रहार करते हुए वर्ष 2025 में पहली बार एनडीपीएस मामलों में SAFEMA के तहत कार्रवाई की गई। 16 मामलों में करीब 14 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की गई है।
वर्ष 2024 में लगभग 64 हजार किलोग्राम गांजा और अन्य नशीले पदार्थों का नष्टीकरण किया गया। आरोपियों की अवैध संपत्तियों को जब्त कर नीलामी की प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है।
राज्य में वर्ष 2016 में एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) थाना स्थापित किया गया था, जिसे अब और मजबूत किया जा रहा है। एटीएस में पहली एफआईआर वर्ष 2025 में दर्ज की गई है।
ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई है। फर्जी सिम बेचने वालों के खिलाफ अपराध दर्ज किए गए हैं। वर्ष 2024 में लगभग 4,300 मोबाइल नंबर ब्लॉक किए गए, जबकि 2025 में करीब 23,000 सिम ब्लॉक किए गए हैं। 255 अवैध ऑनलाइन गैम्बलिंग लिंक्स और पोर्टल भी बंद किए गए हैं। विभिन्न जिलों में साइबर थानों की स्थापना की गई है।
गृह मंत्री ने बताया कि राज्य में नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत आईसीजेएस प्रणाली के माध्यम से पुलिस, अभियोजन, फॉरेंसिक, जेल और न्यायालय—इन पांचों स्तंभों को एकीकृत किया गया है। दुर्ग और बिलासपुर को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विकसित कर मॉडल जिले के रूप में स्थापित किया गया है।
ई-साक्ष्य, ई-समन, ऑनलाइन एफआईआर, ई-साइन, ई-कोर्ट और ई-श्रुति जैसी व्यवस्थाओं से पुलिस प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हुई है। पहले साक्ष्य संकलन में समय लगता था, अब डिजिटल साक्ष्य तत्काल उपलब्ध हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 8 बैंकों के साथ एमओयू कर पुलिस कर्मियों को बिना प्रीमियम सैलरी अकाउंट पर बीमा सुविधा उपलब्ध कराई है। अब तक 15 शहीद पुलिसकर्मियों के आश्रितों को 16 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है।
नक्सलवाद पर सरकार प्रतिबद्ध, सरेंडर करने वाले गिरफ्तार से ज्यादा
पुलिस मुख्यालय में ऑनलाइन कंप्लेंट मैनेजमेंट पोर्टल शुरू किया गया है, जिससे शिकायतों का त्वरित निराकरण संभव हुआ है। पहले डाक के माध्यम से प्रक्रिया होती थी, जिससे देरी होती थी। अब ऑनलाइन निगरानी से जवाबदेही सुनिश्चित हुई है। अपराध समीक्षा एप्लीकेशन से राज्यभर में दर्ज एफआईआर की मॉनिटरिंग की जा रही है।
श्री शर्मा ने कहा कि बस्तर में शांति स्थापना के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। पुनर्वास नीति के तहत बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता अपनाया है। पुनर्वासित युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, आजीविका सहायता और अन्य योजनाओं से जोड़ा जा रहा है।
राज्य की चार केंद्रीय जेलों—रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और अंबिकापुर—को आईएसओ प्रमाणन मिला है। केंद्रीय जेल रायपुर में ‘उमंग-तरंग’ रेडियो स्टेशन संचालित किया जा रहा है। युवा बंदियों के लिए सरगुजा स्कूल ऑफ आर्ट्स की स्थापना कर उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।
गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार कानून व्यवस्था को मजबूत करने, अपराध पर अंकुश लगाने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुआयामी रणनीति पर कार्य कर रही है।









