नई दिल्ली। यह खबर चौंकाने वाली मगर सच है कि ईरान अमेरिका युद्ध Iran Vs Israel-America के दौरान भारतीय मीडिया में मृत हुए लोग जीवित हो रहे हैं। युद्धकालीन खबरों के लिए पूरी तरह से इजरायली प्रोपोगंडा के शिकार मुख्यधारा की मीडिया ने ईरान के पूर्व राष्ट्रपति अहमदीजेनाद को ही नहीं ईरान के सुप्रीम लीडर खेमेनेई के बेटे मुज्तबा ख़ामेनेई को भी मृत घोषित कर दिया था लेकिन दोनों ही जीवित निकले।
पूर्व राष्ट्रपति अहमदीजेनाद 4 मार्च को हमले में मृत ईरानियों के कब्र के आसपास श्रंद्धाजलि देते नजर आए तो मुज्तबा को नया सुप्रीम लीडर बनाये जाने की कवायद शुरू हो गई है। दिलचस्प है कि भारतीय मीडिया ने इस युद्ध को खत्म करने के लिए ईरान द्वारा पहल किए जाने की सूचना भी प्रसारित कर दी। कई जगहों पर यह खबर प्रकाशित की गई कि ईरान बातचीत की मेज पर आना चाहता है जबकि ईरान की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं था।
इन खबरों के प्रसार में AI टूल्स की बड़ी भूमिका बताई जा रही है जो अमेरिकी सेना के कमांड केंद्र सेंटकॉम और तमाम इजरायली और अमेरिकी मीडिया की सूचनाओं को सही बताता रहा है लेकिन पुष्टि के बाद अपनी राय बदल दे रहा है। अमेरिकन F- 15 विमानों को गिराए जाने से लेकर अमेरिकन एंबेसी पर हमले के दौरान भी यह विचलन देखा गया।
X पर फर्जी खबरों की बाढ़ को देखते हुए कंपनी ने उन ट्विटर एकाउंट को प्रतिबंधित करने का फैसला किया है जो युद्ध के दौरान फर्जी तस्वीरों और वीडियो के माध्यम से झूठी खबरें फैला रहे हैं। आज X ने iran war monitor नाम के एक एकाउंट को ब्लॉक किया जिसके बारे में कंपनी ने अपने आधिकारिक हैंडल पर लिखा कि यह एक पाकिस्तानी एकाउंट था जो एक साथ तीस फर्जी एकाउंट चला रहा था और उन पर युद्ध संबंधी फर्जी वीडियो डाल रहा था।इंडियन मीडिया हाउसेज भी ऐसे हैंडल्स के द्वारा प्रेषित वीडियो का इस्तेमाल कर रहे हैं।











