श्रीलंका की अमेरिका को दो टूक, 2 अमेरिकी फाइटर जेट को एंट्री देने से किया मना

Iran US War: ईरान-इजरायल युद्ध के बीच श्रीलंका ने एक बड़ा कदम उठाया है। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने संसद में साफ कहा कि उन्होंने अमेरिका के दो लड़ाकू विमानों को अपने देश में उतरने की इजाजत नहीं दी। अमेरिका ने कई बार अनुरोध किया था लेकिन श्रीलंका ने मना कर दिया।

राष्ट्रपति दिसानायके ने संसद में कहा ‘हम युद्ध के पक्ष में नहीं हैं। न तो हम श्रीलंका को इस युद्ध में घसीटने देंगे। हमारे लिए अमेरिका और ईरान दोनों बराबर हैं। अगर हम ईरान की मदद नहीं कर रहे हैं तो अमेरिका की मदद क्यों करें?’

स्थानीय मीडिया के अनुसार, अमेरिका ने श्रीलंका के दक्षिण-पूर्व में स्थित मत्ताला अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर दो लड़ाकू विमानों को उतारने की मांग की थी। अगर इजाजत मिल जाती तो इन विमानों से ईरान पर बड़ा हमला संभव था। श्रीलंका ने साफ इनकार कर दिया। इससे पहले तुर्की और स्पेन ने भी अमेरिका को अपने बेस इस्तेमाल करने से मना किया था।

श्रीलंका ने ईरान की पहले भी मदद की थी

ईरान के डेना युद्धपोत को अमेरिका ने डुबो दिया था। उस वक्त श्रीलंका ने मानवीय मदद की। श्रीलंका ने पहले रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया फिर मारे गए लोगों के शव ईरान पहुंचाए और घायलों का इलाज करवाकर सुरक्षित जगह भेजा। राष्ट्रपति दिसानायके ने कहा, ‘यह हमारा मानवीय कर्तव्य था। लेकिन युद्ध में हम किसी का साथ नहीं दे रहे। युद्ध से सिर्फ नुकसान होता है। हम शांति और विकास चाहते हैं।’

मुस्लिम दुनिया में ईरान अकेला क्यों?

मुस्लिम देशों में ईरान अब काफी अलग-थलग पड़ गया है। ईरान के पूर्व सर्वोच्च सुरक्षा परिषद सचिव अली लारिजानी ने हाल ही में सभी मुस्लिम देशों को पत्र लिखकर समर्थन मांगा था लेकिन अब तक किसी देश ने खुलकर जवाब नहीं दिया। तुर्की ने अमेरिका को बेस देने से मना किया था लेकिन बाकी देश चुप हैं।

श्रीलंका का यह फैसला न सिर्फ ईरान के लिए समर्थन का संकेत है बल्कि छोटे देशों की स्वतंत्र विदेश नीति का भी उदाहरण है। श्रीलंका ने साफ कर दिया है कि वह किसी बड़े देश के दबाव में नहीं आएगा और शांति की राह पर चलेगा।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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