भारत का स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC बंद,रेल,सेना,फिशिंग जैसी कई सेवायें होंगी प्रभावित

March 16, 2026 5:49 PM

भारत के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC को बड़ा झटका लगा है। इसरो ने पुष्टि की है कि IRNSS-1F सैटेलाइट की आखिरी एटॉमिक क्लॉक 13 मार्च 2026 को फेल हो गई। इससे NavIC अब सिर्फ तीन सैटेलाइट्स पर टिका है – जबकि पोजिशनिंग और नेविगेशन के लिए कम से कम चार की जरूरत होती है। ये सैटेलाइट को 10 मार्च 2016 में लॉन्च किया गया था। इसने ठीक 10 साल की अपनी डिजाइन मिशन लाइफ 10 मार्च 2026 को पूरी की। लेकिन 13 मार्च को इसकी आखिरी एटॉमिक क्लॉक काम करना बंद कर गई। इसरो का कहना है कि सैटेलाइट अब भी ऑर्बिट में है और एक-तरफा ब्रॉडकास्ट मैसेजिंग सर्विसेज दे रहा रहेगा, लेकिन पोजिशन, नेविगेशन और टाइमिंग (PNT) सेवाएं प्रभावित होंगी।


NavIC भारत और 1500 किमी के आसपास के इलाके में सटीक लोकेशन, नेविगेशन और टाइमिंग देता है। कई सेवाएं – जैसे रेलवे, फिशिंग, डिजास्टर मैनेजमेंट और सेना – इसी पर निर्भर हैं। सैटेलाइट बंद होने की वजह से इन पर असर पड़ सकता है.
पहले से ही कई पुराने IRNSS सैटेलाइट्स की एटॉमिक क्लॉक्स फेल हो चुकी हैं। अब सिर्फ तीन बचे हैं, और इनमें से कुछ भी अपनी लाइफ से ज्यादा समय चल रहे हैं।

यह झटका इसलिए बड़ा है क्योंकि NavIC अमेरिकी GPS का स्वदेशी विकल्प है,, खासकर 1999 के कारगिल युद्ध में GPS की समस्या के बाद भारत ने इसे बनाया लेकिन एटॉमिक क्लॉक फेलियर की समस्या पुरानी है। पहले की पीढ़ी के कई सैटेलाइट्स में आयातित क्लॉक्स फेल हुए। अब नई NVS सीरीज में स्वदेशी रुबिडियम क्लॉक्स लगाए जा रहे हैं। इसरो नई सैटेलाइट्स लॉन्च करके कंसटेलेशन को मजबूत करने की योजना पर काम कर रहा है। लेकिन फिलहाल NavIC की क्षमता कम हो गई है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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