India Petrol Diesel Prices : अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार को हिला दिया है। तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसके चलते ट्रम्प प्रशासन ने ईरानी तेल की खरीद पर 30 दिनों की अस्थायी छूट दे दी है। यह छूट केवल उन टैंकरों पर लागू है जो पहले से समुद्र में ईरानी तेल लेकर लटके हुए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इसकी घोषणा की। ट्रेजरी विभाग की वेबसाइट के अनुसार, यह छूट 20 मार्च 2026 से 19 अप्रैल 2026 तक वैध रहेगी। बेसेंट ने कहा कि इससे दुनिया में लगभग 14 करोड़ बैरल तेल तेजी से बाजार में आएगा। इससे ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ेगी और सप्लाई पर बना दबाव कम होगा।
युद्ध शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 70-80 डॉलर प्रति बैरल थी लेकिन अब यह 110-112 डॉलर के आसपास पहुंच गई है। कुछ दिनों में यह 120 डॉलर तक भी छू चुकी है। मुख्य वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है। यह महत्वपूर्ण जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया का करीब 20% पेट्रोलियम इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान के हमलों और खतरे के कारण टैंकर अब यहां से नहीं गुजर रहे।
भारत के लिए यह बड़ी चुनौती है क्योंकि हम अपनी जरूरत का करीब 50% कच्चा तेल और काफी एलएनजी इसी रूट से मंगाते हैं। भारत 85% से ज्यादा तेल आयात करता है। ट्रम्प प्रशासन ने रूसी तेल पर भी दूसरी बार छूट दी है। गुरुवार को जारी नए ‘जनरल लाइसेंस’ के तहत 12 मार्च तक लोड हो चुके रूसी टैंकरों से तेल बेचने की इजाजत है। यह छूट 11 अप्रैल 2026 तक चलेगी। नए लाइसेंस में उत्तर कोरिया, क्यूबा और क्रीमिया को बाहर रखा गया है। इससे पहले 12 मार्च को जारी पुराने लाइसेंस में कुछ कमियां थीं, इसलिए इसे बदला गया।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूसी तेल पर पाबंदी लगाई थी तब रूस को डिस्काउंट पर तेल बेचना पड़ता था। लेकिन ईरान युद्ध ने सब बदल दिया। होर्मुज बंद होने से रूसी तेल अब प्रीमियम पर बिक रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 30 रूसी टैंकर एशियाई देशों के पास लटके हैं। ज्यादा खरीदार आने से रूस ज्यादा कीमत वसूल सकता है, जिससे भारतीय रिफाइनरीज के लिए महंगा पड़ सकता है।
ट्रम्प ने ईरान के खर्ग आइलैंड पर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। यह द्वीप ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है। यहां से 90% तेल एक्सपोर्ट होता है। ट्रम्प ने धमकी दी है कि अगर ईरान होर्मुज नहीं खोलेगा तो तेल प्रतिष्ठानों पर भी हमला किया जाएगा। ऐसा होने पर तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
ईरान पर तेल प्रतिबंध 1979 से लगे हैं, जब अमेरिकी दूतावास में बंधक बनाए गए थे। 2015 में ओबामा के समय JCPOA समझौते से कई पाबंदियां हटीं। लेकिन 2018 में ट्रम्प ने समझौते से बाहर निकलकर फिर कड़े प्रतिबंध लगा दिए।










