नफरत के दौर में सैनिक से लेकर मुस्लिम तक सभी निशाने पर

February 23, 2026 11:41 PM
India Hate Lab Report

नई दिल्ली। यह नफ़रत का ऐसा सिलसिला है जो ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा। इंडिया हेट लैब नामक एक थिंक टैंक का कहना है कि भारत में नफ़रती हिंसा 2024 में 74 फ़ीसदी बढ़ गई जो 2025 में भी जारी रही।

देश में मुस्लिमों के ख़िलाफ़ चल रही नफ़रत का दायरा अब बढ़ गया है और नफ़रत दिखाने के तरीक़े भी बदल गए हैं। अब शिकार हर कोई हो रहा है भले वो सैनिक हो, पत्रकार हो, दलित हो, पिछड़ा हो, महिला हो मुस्लिम हो, कोई भी हो इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता।अब केवल धर्म के नाम पर हिंसा नहीं हो रही है, हिंसा की वजह कुछ भी हो सकती है।

आज के न्यूयार्क टाइम्स में भारत में बढ़ते नफ़रत के दौर को लेकर कहा गया है “भारत में धार्मिक आधार पर हिंसा कोई नई बात नहीं है। लेकिन पिछले दिनों संभल में जो कुछ घटित हुआ साक्षात्कारों और अदालती दस्तावेजों में दर्ज है उसने एक नई वास्तविकता को स्पष्ट कर दिया है।

यह ख़ौफ़नाक सच है कि राज्य सरकारें जो कभी मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रयास करती थीं, अब तेजी से उन ताकतों की शक्ति के रूप में काम कर रही हैं जो भारत के धर्मनिरपेक्ष गणराज्य को हिंदू-प्रधान राष्ट्र के रूप में पुनर्परिभाषित कर रही हैं।” पिछले दो दिनों में देश के अलग अलग हिस्सों में नफ़रती हिंसा के चौंका देने वाले मामले सामने आए हैं।

सर्वाधिक चौंकाने वाली घटना उत्तर प्रदेश के बंदायूं जिले से आई है। वहां पर बजरंग दल के प्रखंड संयोजक अक्षय ठाकुर ने कथित तौर पर स्कूटी को पास न देने के आरोप में तीन मुस्लिम बुजुर्गों को थप्पड़ों से बुरी तरह से मारा। इस घटना की पूरे देश में भर्त्सना हुई है। फिलहाल पुलिस ने अक्षय ठाकुर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

बेहद चौंकाने वाला एक मामला दिल्ली से सामने आया है। दिल्ली में रहने वाली अरुणाचल प्रदेश की 3 महिलाओं पर उनकी ही सोसायटी में रहने वाले एक दंपत्ति नेनस्लीय कमेंट्स किए गए। उन्हें मोमो कहा, धंधेवाली कहा, मसाज पार्लर चलाने का आरोप लगाया।

पूरा विवाद गंदगी फैलाने को लेकर था, जिसमें पड़ोसी महिलाओं ने नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं के लिए ऐसा कहा। आरोपी महिला ने कहा– “मेरा पति कितना जवान है, अगर ये जानना है तो उसके साथ बेडरूम में चली जा। वो पॉलिटीशियन का बेटा है। उसका बाप कस्टम ऑफिसर है “दिल्ली पुलिस ने इस मामले में पड़ोसी हर्ष सिंह और पत्नी रूबी जैन के खिलाफ केस दर्ज किया। मेघालय के CM ने भी इस भेदभाव पर आपत्ति जताई है।

पूर्व सांसद की मुस्लिम महिलाओं से बदसलूकी

एक और चौंका देने वाली घटना राजस्थान के टोंक जिले से सामाने आई है जहाँ कंबल वितरण कार्यक्रम में पूर्व भाजपा सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने कुछ महिलाओं से धर्म के आधार पर भेदभाव किया गया और उन्हें दिए गए कंबल वापस ले लिए गए।कंबल वितरण के दौरान पूर्व सांसद ने एक महिला से उसका नाम पूछा। महिला ने अपना नाम सकुरान खान बताया। इसके बाद जौनपुरिया भड़क गए।

पूर्व बीजेपी सांसद मुस्लिम महिला का नाम सुनते ही आगबबूला हो गए और कहा कि जो लोग प्रधानमंत्री को गाली देते हैं, उन्हें कंबल लेने का हक नहीं है। उन्होंने महिला से कंबल वहीं छोड़ने को कहा और एक तरफ हटने के लिए कहा। बताया जा रहा है कि इसके बाद अन्य मुस्लिम महिलाओं को भी दिए गए कंबल वापस लेने की बात कही गई। इस दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश भी की, लेकिन पूर्व सांसद ने इसे अपना निजी कार्यक्रम बताते हुए किसी तरह की बहस से इनकार कर दिया।

पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने पूरे मामले को लेकर कहा कि यह उनका निजी कार्यक्रम था, कोई सरकारी योजना का हिस्सा नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्हें यह अधिकार है कि वे अपने कार्यक्रम में किसे बुलाएं और किसे नहीं।

वायुसैनिक और उसके पिता की भीड़ ने की पिटाई

एक बड़ी घटना यूपी के बुलंदशहर जिले में घटी है जहां जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के अमरगढ़ गांव में एक वायुसैनिक और उसके पिता पर हमला किया गया है, जहां सड़क पर निकल रही एक बारात के दौरान मामूली बात पर विवाद इतना बढ़ गया कि एयरफोर्स जवान और उसके प्रधानाध्यापक पिता पर लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया गया।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।जानकारी के मुताबिक, अमरगढ़ गांव निवासी जितेंद्र सिंह एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक हैं। बीते गुरुवार को वह अपने बेटे प्रथम सिंह के साथ गांव में आयोजित एक सगाई समारोह से कार द्वारा घर लौट रहे थे।

प्रथम सिंह भारतीय वायुसेना में जवान के पद पर तैनात हैं। इसी दौरान रास्ते में आकाश वर्मा की बारात गुजर रही थी। डीजे की धुन पर सड़क पर घुड़चढ़ी का कार्यक्रम चल रहा था और बाराती सड़क पर नाच रहे थे। आरोप है कि कई बाराती नशे में थे और हाथों में शराब की बोतलें लिए हुए थे।

बताया जा रहा है कि कार चला रहे प्रथम सिंह ने आगे बढ़ने के लिए हल्का हॉर्न बजाकर साइड मांगी। इसी बात पर कुछ बाराती भड़क उठे और गाली-गलौज शुरू कर दी। जब पिता-पुत्र ने विरोध किया तो मामला हाथापाई में बदल गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि आरोपियों ने लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। मारपीट के दौरान दोनों सड़क पर गिर पड़े और कुछ समय के लिए बेहोश हो गए। यह भी आरोप है कि हमले के दौरान उनके हाथ की घड़ी और सोने की चेन गायब हो गई।

एमपी में वर्दी पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश के जबलपुर में पिछले दिनों हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद चौंका देने वालाई घटना सामने आई है। जिले के सिहोरा स्थित आजाद चौक में पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटना के बाद 49 लोगों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, अब पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में सिर्फ अल्पसंख्यकों के खिलाफ कार्रवाई की, जबकि इसके उलट आरोपियों को छोड़ दिया। मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ प्रत्यक्षदर्शियों दावा है कि गिरफ्तार किए गए लोग उस समय तरावीह की नमाज पढ़ रहे थे और उनका हिंसा से कोई ताल्लुक नहीं है।

नफ़रत के दौर में मोहब्बत के किस्से

लेकिन नफ़रत के इस दौर में भी मोहब्बत के किस्से सामने ही आ जाते हैं। यूपी में लखनऊ यूनिवर्सिटी के भीतर एक मस्जिद है। प्रशासन ने ऐतिहासिक लाल बारादरी इमारत और उसमें स्थित मस्जिद के गेट को सुरक्षा कारणों से सील कर बैरिकेडिंग लगा दी। छात्र नेताओं और मुस्लिम छात्रों ने इस कार्रवाई के खिलाफ परिसर में जोरदार प्रदर्शन किय। यूनिवर्सिटी ने कथित तौर पर एएसआई संरक्षित इस जर्जर इमारत से होने वाले संभावित खतरे को रोकने के लिए यह कदम उठाया। इसके जवाब में छात्रों ने बैरिकेडिंग गिरा दी और मस्जिद के बाहर ही नमाज पढ़ी।

इस दौरान सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए हिंदू छात्रों ने नमाजियों के पीछे ढाल बनकर सुरक्षा घेरा बनाया। महत्वपूर्ण है कि लाल बारादरी लगभग 200 साल पुरानी ऐतिहासिक संरचना है, जिसका निर्माण 1800 ईस्वी में नवाब नसीरुद्दीन हैदर ने कराया था।

यह इमारत विश्वविद्यालय की स्थापना से भी पुरानी है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना के इस प्राचीन मस्जिद वाले हिस्से को बंद कर दिया। इस अचानक हुई कार्रवाई से नाराज छात्र बड़ी संख्या में बारादरी के सामने जमा हो गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

प्रदर्शन के दौरान यूनिवर्सिटी परिसर में एक दिलचस्प दृश्य देखा गया। जब मस्जिद का गेट बंद होने के कारण मुस्लिम छात्रों ने बाहर ही नमाज पढ़ना शुरू किया, तब उनके हिंदू साथी उनके बचाव में उतर आए। हिंदू छात्रों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर नमाज को संपन्न कराया।

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