नई दिल्ली। झारखंड में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेके चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के चुनाव क्षेत्र गोड्डा में अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची से काटे जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। 5 अगस्त को ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल प्रकाशित हुआ था। जिसके बाद बीजेपी के कई बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) फॉर्म 7 लेकर आ रहे हैं और कुछ वोटरों को हटाने की मांग कर रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि जिन नामों पर वे आपत्ति जता रहे हैं, उनमें से ज्यादातर मुस्लिम समुदाय से हैं। इनमें अब्दुल मन्नान खान, मोहम्मद नौशाद, मोहम्मद शफीक, बीबी बसिलन, मोहम्मद असलम शामिल हैं, जो झारखंड के गोड्डा जिले के हैं। पिछले एक महीने से यही पैटर्न सामने आया है। हालांकि बीएलओ इन दावों को स्वीकार नहीं कर रहे।
बीएलओ ने नाम काटने के फार्म लेने से किया इनकार
समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस की जांच में पता चला कि करीब चार बूथों पर BLO ने इन आवेदनों को लेने से मना कर दिया। BLO ने उन्हें प्रक्रिया के हिसाब से सही नहीं बताया। BLO राज्य सरकार के कर्मचारी हैं और झारखंड में अभी जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन की सरकार है।बीजेपी ने शिकायत की है कि BLO फॉर्म स्वीकार न करने के लिए दोषी हैं, जिससे राजनीतिक हलचल मची हुई है। ऐसे में जमीनी चुनाव अधिकारियों और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच टकराव पैदा हो गया है, जो अब चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के दफ्तर तक पहुंच गया है।
इंडियन एक्सप्रेस ने कुछ ऐसे मतदाताओं को ट्रैक किया जिनके नाम हटाए जाने थे और पाया कि वे न केवल पीढ़ियों से गांव में मौजूद हैं, बल्कि उनमें से कई 2003 में सूची के इंटेंसिव रिवीजन में वेरिफाइड भी हैं। चुनाव आयोग के अपने नियमों के तहत इससे उन्हें चल रहे SIR में शामिल करना आसान होना चाहिए।
बीजेपी के बूथ लेवल एजेंट्स ने जताई आपत्ति
उदाहरण के लिए गोड्डा के महेशटिकरी गांव के बूथ नंबर 9 में अकेले एक बूथ पर बीजेपी के एक BLA संजीव कुमार रोशन ने मतदाताओं के खिलाफ ऐसे 25 फॉर्म दाखिल किए थे। इनमें से 8 मतदाताओं से बात की गई और उन सभी ने वोट देने से वंचित होने या सरकारी योजनाओं के रोस्टर से कट जाने का डर जताया। पास के एक बूथ पर एक BLA ऐसे 75 फॉर्म लेकर आया और जब BLO ने उससे पूछताछ की, तो उसने खुद माना कि उसने फॉर्म को तुरंत वहीं जला दिया।गोड्डा डिवीजन के बसंतराय के ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) श्रीमन मरांडी के तहत ये बूथ आते हैं। उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के तौर पर उन्हें चार बूथों (महेशटिकरी, पचुआ किता, लोचनी और बाघाकोल) से शिकायतें मिली थीं। मरांडी ने कहा कि फील्ड वेरिफिकेशन के बाद एक जांच रिपोर्ट जमा की जाएगी, साथ ही BLO को फॉर्म पर कार्रवाई न करने के लिए कहा गया था क्योंकि हमें फॉर्म का स्रोत नहीं पता था। उन्होंने कहा, “वे (BLA) पहले एसडीओ को या मुझे जांच करने के लिए कहकर एक लिखित शिकायत दे सकते थे।” इस मामले पर आरजेडी के गोड्डा विधायक संजय प्रसाद यादव ने कहा कि उन्होंने श्रीमन मरांडी से बात की है और उन्हें बताया गया है कि कार्रवाई की जा रही है।
5 अगस्त को ड्राफ्ट लिस्ट हुई थी प्रकाशित
झारखंड में SIR की प्रक्रिया 30 जून को शुरू हुई थी और 5 अगस्त को एक ड्राफ्ट लिस्ट प्रकाशित की गई थी, जिसमें 16.48% वोटरों (लगभग 43 लाख) के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे। क्लेम और ऑब्जेक्शन का राउंड अभी चल रहा है और यह 4 सितंबर को खत्म होगा। फॉर्म 7 के जरिए नाम हटाने के लिए कई वजहें हो सकती हैं, जैसे अनुपस्थित, शिफ्टेड, मृत, डुप्लीकेट, या भारतीय नागरिक न होना। आवेदक को कोई सबूत जमा करने की जरूरत नहीं है, लेकिन उसे एक घोषणा पर साइन करना होगा जिसमें लिखा हो कि वह अपनी पूरी जानकारी और विश्वास के अनुसार यह घोषणा कर रहा/रही है, और झूठा बयान देने पर सजा हो सकती है।
बीजेपी के बूथ लेवल एजेंट कर रहे खेल
महेशटिकरी की BLO अनीशा बानो ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि बीजेपी के एक BLA के पास लगभग 25 फॉर्म थे, जो वह लेकर आया था और वे ओरिजिनल नहीं थे। उन्होंने कहा, “BLA ने कहा कि ये फॉर्म उन वोटरों के लिए हैं जो गांव में नहीं हैं और बाद में ऐसे 50 और फॉर्म लाए जाएंगे और सभी फॉर्म में मुस्लिम वोटर थे। मैंने 25 फॉर्म ले लिए लेकिन बाद में BDO मरांडी ने BLO को बताया कि ऐसे दस्तावेज आधिकारिक फॉर्म नहीं हैं और उन्हें स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए मैंने बाकी फॉर्म लेने से मना कर दिया। जिन वोटरों के खिलाफ आपत्ति उठाई गई, उन सभी को 2003 के इलेक्टोरल रोल से मैप किया गया था।
BLO का क्या कहना है
पचुआ किता BLO मुख्तार ने कहा कि एक BLA उनके पास लगभग 75 फॉर्म 7 लेकर आया था, जो ब्लॉक ऑफिस से उन्हें आधिकारिक मिले फॉर्म से अलग थे। मुख्तार ने कहा, “BLA ने मुझसे पूछा कि फॉर्म किस लिए है और कहा कि उन्हें बताया गया था कि यह नाम जोड़ने के लिए है। मैंने उनसे कहा कि बल्कि आपको गवाह बनाया जा रहा है कि इस व्यक्ति का नाम हटा दिया जाना चाहिए। मैंने फॉर्म नहीं लिए। 75 फॉर्म में लगभग सभी नाम मुसलमानों के थे और ज्यादातर 2003 की लिस्ट से जुड़े थे। जिस BLA ने उन्हें 75 फॉर्म देने की कोशिश की थी, उसने सभी को जला दिया।
मुस्लिमों में दहशत
महेशटिकरी गांव में कई गांववालों ने बूथ नंबर 9 पर उनके खिलाफ एक साथ फॉर्म 7 जमा करने की शिकायत BDO मरांडी से की है। 70 साल के अब्दुल मन्नान खान उनमें से एक हैं। उन्होंने कहा कि वह और उनका परिवार पीढ़ियों से गांव में रह रहा है, और उनका नाम 2003 के रोल में था। उन्होंने कहा, “यह हमारा घर है और हम झारखंडी भी हैं। तो हमारे नाम कैसे हटाए जा सकते हैं? BLO बानो ने हमें भरोसा दिलाया है कि उनके नाम रहेंगे, लेकिन हमें डर है कि सरकारी फायदे नहीं मिलेंगे।”50 साल के मोहम्मद नौशाद ने कहा कि उनके दादा-दादी का नाम 2003 के इलेक्टोरल रोल में था, जबकि उन्होंने अपना बचपन महेशटिकरी में बिताया और मजदूरी करने के लिए घर छोड़ा था।
नौशाद ने कहा कि वह झारखंड में वोट देते रहते हैं। उन्होंने कहा, “मैं वहीं जाता हूं, जहां मुझे काम मिलता है। क्या होगा अगर हमारे नाम हटा दिए जाएं और हमें सरकारी फायदे न मिलें? क्या होगा अगर हमें भारतीय नागरिक नहीं माना गया?”नौशाद के पिता 80 साल के मोहम्मद शफीक ने कहा कि वह भी अपनी पत्नी 65 साल की बीबी बसीलन के साथ महेशटिकरी में रजिस्टर्ड वोटर हैं। उन्होंने कहा, “मैं 18 साल की उम्र से यहां वोट दे रहा हूं। हम इतने सालों से यहां हैं। हमारे पास खतियान (झारखंडी होने का जमीन का सबूत), हर रिकॉर्ड और कागजात हैं। अब अचानक एक रुकावट आ गई है।”65 साल के मोहम्मद असलम, जो खुद भी एक मजदूर हैं, उन्होंने कहा कि मैंने और मेरे परिवार के सभी योग्य सदस्यों ने हमेशा गांव में वोट दिया है। फॉर्म 7 आवेदन पर उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि हम यहां के नहीं हैं। हम इतने पढ़े-लिखे नहीं हैं कि इसके नतीजे समझ सकें।”
वोटरों में भाई डर, पहले शामिल नाम भी काटे
61 साल के मिर्जा गालिब, जो दिल्ली के पास गाजियाबाद में काम करते हैं, लेकिन घर वापस आ गए हैं। उन्होंने कहा कि उनका जन्म महेशटिकरी में हुआ था और उन्होंने अपनी ज्यादातर जिंदगी गांव में बिताई है। उन्होंने कहा कि सब कुछ यहीं है। करीब 45 साल के मजदूर शमीम ने कहा कि उन्हें अपने खिलाफ फॉर्म 7 आवेदन के बारे में तब पता चला जब एक आंगनवाड़ी वर्कर ने उन्हें बताया। उन्होंने कहा, “मेरे आवेदन के साथ ऑनलाइन सब कुछ ठीक है। मेरे पास रसीद भी है।”
शमीम ने कहा कि वह काम के लिए झारखंड से बाहर जाते हैं, लेकिन उनका परिवार राज्य में ही रहा है। उन्होंने कहा, “हमारे पुरखे यहीं रहते थे। मेरे पिता और तीन भाई यहीं हैं। एक भाई बिहार में रहता है और उसका वोटर आईडी वहीं है। उसके अलावा हमारे आधार कार्ड, पते और सब कुछ झारखंड का है।”मोहम्मद हसमुद्दीन करीब 60 साल के हैं और एक दिहाड़ी मजदूर हैं। उन्होंने कहा कि उनका बचपन महेशटिकरी में बीता, जहां उनके परिवार की जमीन है और खतियान भी है। उन्होंने कहा कि उनका नाम 2003 की वोटर लिस्ट में भी था और पहले गोड्डा में वोट दिया था। हसमुद्दीन ने कहा, “मेरे पिता, दादा और परदादा सभी इसी घर में रहे हैं। हमने अपना घर भी नहीं बदला है। दिल्ली में काम करने वाला बेटा भी वोट देने के लिए गांव आता है।”
बीजेपी का क्या है तर्क?
27 अगस्त को बीजेपी के झारखंड SIR कन्वीनर राकेश प्रसाद ने अतिरिक्त सीईओ को एक मेमोरेंडम दिया, जिसमें राज्य में खासकर साहिबगंज और गोड्डा जिलों में SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों की शिकायत की गई थी। गोड्डा के मामले में बीजेपी ने दो बूथों के BLO पर अपने BLA द्वारा जमा किए गए फॉर्म 7 आवेदन को स्वीकार करने से मना करने का आरोप लगाया। बीजेपी ने पूछा कि बूथ नंबर 9, महेशटिकरी की BLO बानो ने अपने BLA की डिटेल्स कैसे पब्लिक कीं। बीजेपी ने दावा किया कि इससे BLA पर दबाव बना और उसे धमकियां मिलीं।
गोड्डा के पूर्व बीजेपी विधायक अमित कुमार मंडल ने कहा कि यह उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है और उन्हें इसकी ट्रेनिंग दी गई है, जिसमें फॉर्म 6 (नए वोटरों के लिए) और फॉर्म 8 (एंट्री में बदलाव या सुधार रिकॉर्ड करने के लिए) का इस्तेमाल शामिल है।
अमित मंडल ने कहा, “अगर किसी का नाम दो जगहों पर दिख रहा है, तो BLA नाम हटाने के लिए आपत्ति उठा सकता है।” इस आरोप पर कि फॉर्म 7 दस्तावेज बल्क में बांटे जा रहे हैं, जिसमें एक BLA 75 फॉर्म तक जमा कर रहा है, अमित मंडल ने कहा कि एक BLA कितने आवेदन जमा कर सकता है, इसकी कोई तय सीमा नहीं है और आपत्ति को वेरिफाई करना चुनाव अधिकारियों की जिम्मेदारी है।










