जून में अडानी ने न्यूक्लियर पावर स्टेशन बनाने की बात कही, एक महीने के भीतर हो गई ऑस्ट्रेलिया इंडिया में यूरेनियम की डील

नई दिल्ली। आप इसे महज संयोग कह सकते हैं कि अडानी ग्रुप ने पिछले महीने 24 जून को अपनी जनरल बॉडी की मीटिंग में कहा कि वह 2035 तक 10 गीगावाट तक की Nuclear Power क्षमता विकसित करने जा रही है एक महीने भी नहीं हुए पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थे और वहां पर न्यूक्लियर डील कर रहे थे।

अडानी का मानना है कि वह जल्द ही देश की सबसे बड़ी प्राइवेट सेक्टर न्यूक्लियर ऑपरेटर कंपनी बन सकती है। नहीं भूला जाना चाहिए आजादी के लगभग आठ दशकों बाद पिछले साल सरकार ने न्यूक्लियर जनरेशन क्षेत्र को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोल दिया था। भारत का लक्ष्य वर्तमान में लगभग 8 गीगावाट से बढ़ाकर 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर क्षमता पहुंचाना है।

ऑस्ट्रेलिया जो कि यूरेनियम उत्पादन की द्रष्टि से दुनिया का चौथा बड़ा देश है भारत को यूरेनियम की सप्लाई करने पर राजी हो गया है। नहीं भूला जाना चाहिए कि भारत ने परमाणु निरस्त्रीकरण समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं जबकि आस्ट्रेलिया से किया है ऐसे में इस समझौते को एक बड़ी जीत माना जा रहा है। लेकिन यह नहीं भूला जाना चाहिए कि इससे अडानी को सीधा लाभ पहुंचेगा।

न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCIL) वर्तमान में भारत का एकमात्र न्यूक्लियर प्लांट ऑपरेटर 50 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य रखता है। देश की सबसे बड़ी कोल पावर कंपनी NTPC भी 30 गीगावाट न्यूक्लियर क्षमता का लक्ष्य बना रही है। इसके बाद अडानी संभवतः तीसरी सबसे बड़ी न्यूक्लियर ऑपरेटर बन जाएगी। टाटा पावर और रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत कई अन्य प्राइवेट कंपनियां भी इस क्षेत्र में निवेश करने पर विचार कर रही हैं।

अडानी ग्रुप ने परियोजनाओं के लिए जमीन की पहचान कर ली है, लेकिन परियोजनाओं के स्थान समेत अन्य विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। अदानी ने यह भी कहा कि ग्रुप का डेटा सेंटर बिजनेस 2030 तक 3 गीगावाट क्षमता बनाने के रास्ते पर है। साथ ही बढ़ती गैस मांग को पूरा करने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस परियोजनाओं को तेजी दी जा रही है।

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