नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में 11,200 मेगावाट की प्रस्तावित सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना के विरोध में प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़कने के बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल से RAF की दो कंपनियां राज्य में भेजी हैं।अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया कि करीब 250 कर्मियों वाली आरएएफ की दोनों कंपनियों को भारतीय वायुसेना के विमान के जरिए नवी मुंबई से अरुणाचल प्रदेश भेजा जाएगा।
पासीघाट में होगी तैनाती
केंद्र सरकार द्वारा भेजी जा रही ये टुकड़ियां पासीघाट में तैनात की जानी हैं RAF, नीली वर्दी पहनने वाली सीआरपीएफ की एक विशेष दंगा-रोधी इकाई है। हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में सीआरपीएफ की कई अन्य इकाइयां पहले से तैनात हैं। अरुणाचल प्रदेश में सीआरपीएफ की दो से तीन बटालियन स्थायी रूप से तैनात रहती हैं।
अधिकारियों ने बताया कि सीआरपीएफ के जवानों ने शुक्रवार से प्रदर्शनों के दौरान प्रभावी ढंग से स्थिति संभाली तथा हिंसा को और बढ़ने से रोका। उन्होंने कहा कि घायल हुए पुलिस और केंद्रीय बलों के कई कर्मियों में सीआरपीएफ के जवान भी शामिल हैं।
बीजेपी नेताओं के घर पर की तोड़फोड़
अरुणाचल प्रदेश पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार रात पूर्वी सियांग जिले में एक भीड़ ने एनएचपीसी के कार्यालय और एक पुलिस थाने में आग लगा दी तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष समेत तीन नेताओं के आवासों में तोड़फोड़ की।
मुख्यमंत्री ने की शांति की अपील
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार लोकतंत्र का एक आवश्यक हिस्सा है, लेकिन यह जरूरी है कि प्रदर्शन कानून के दायरे में रहें और इनके कारण संपत्ति को नुकसान न पहुंचे तथा सार्वजनिक व्यवस्था बाधित न हो। उन्होंने पासीघाट की घटनाओं को खेदजनक बताते हुए समाज के सभी वर्गों से शांति बनाए रखने की अपील की।
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री खांडू ने कहा कि प्रस्तावित बिजली परियोजना के विरोध में सियांग, अपर सियांग और पूर्वी सियांग जिलों में शुक्रवार को आयोजित 12 घंटे का बंद काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा लेकिन बंद समाप्त होने के बाद पासीघाट में हिंसा भड़क उठी, जो शनिवार तड़के साढ़े तीन बजे तक जारी रही।
बांध परियोजना की वजह से 9 जून को भी हुई थी हिंसा
अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले में बांध परियोजना को लेकर नौ जून को भी हिंसा भड़की थी। तब कई गांववालों के घरों में तोड़फोड़ की गई थी। उन गांव वालों ने इस परियोजना के पक्ष में एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। वर्ष 2017 में 11,000 मेगावाट की यह परियोजना प्रस्तावित की गई थी, तब से गांव और खेत को प्रभावित होने को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे।
पिछले कुछ साल से, राज्य के अधिकारी और नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कारपोरेशन के कर्मी काम शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन स्थानीय स्तर पर विरोध के कारण काम ठप पड़ा है।










