दुनिया पर 34,675 लाख करोड़ रुपये का कर्ज, ब्याज चुकाने में खर्च हो रहे अरबों, जानिये भारत का हाल

लेंस डेस्क। दुनिया के देशों पर कुल मिलाकर करीब 34,675 लाख करोड़ रुपये का कर्ज (world debt) है। इसमें सिर्फ सरकारों का ही नहीं, कंपनियों और परिवारों का कर्ज भी शामिल है। इस भारी कर्ज पर ब्याज चुकाने का बोझ लगातार बढ़ रहा है। कई देशों में सरकारों को स्वास्थ्य, शिक्षा और पेंशन जैसी जरूरी योजनाओं के लिए कम पैसा बच पा रहा है।

फ्रांस में कर्ज लेना महंगा हुआ

यूरोप में बढ़ते सरकारी कर्ज और बजट घाटे को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। फ्रांस की स्थिति खासतौर पर चिंताजनक है। अक्टूबर 2026 में फ्रांस के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड करीब 5 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं जर्मनी में यही दर 3.41 प्रतिशत थी। यानी फ्रांस को जर्मनी के मुकाबले ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा है। फ्रांस की यील्ड अब इटली और ग्रीस से भी ऊपर चली गई है। ब्रिटेन में भी दरें ऊंची बनी हुई हैं।

सरकारें कर्ज कैसे लेती हैं?

सरकारें टैक्स और दूसरे स्रोतों से आने वाले पैसे के अलावा सरकारी बॉन्ड जारी करके भी पैसे जुटाती हैं। सड़क, रेल, अस्पताल या रक्षा जैसी योजनाओं के लिए जब पैसे की जरूरत होती है, तो सरकार बॉन्ड बेचती है। बैंक, बीमा कंपनियां और म्यूचुअल फंड इन बॉन्ड को खरीदते हैं।

उदाहरण के लिए, अगर सरकार 100 रुपये का 10 साल का बॉन्ड 2.5 प्रतिशत ब्याज पर जारी करती है, तो वह हर साल 2.50 रुपये ब्याज देगी और 10 साल बाद 100 रुपये वापस करेगी। कई बार नया कर्ज पुराना कर्ज चुकाने के लिए भी लिया जाता है। ब्याज दर बाजार की स्थिति, महंगाई और निवेशकों की मांग पर निर्भर करती है।

जब कर्ज महंगा पड़ता है तो क्या होता है?

जब बॉन्ड की कीमतें गिरती हैं, तो उनकी यील्ड बढ़ जाती है। इससे सरकार के लिए नया कर्ज लेना महंगा हो जाता है। ज्यादा ब्याज चुकाने के कारण स्कूल, अस्पताल और सड़कों जैसी सुविधाओं पर खर्च करने के लिए कम पैसा बचता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे होम लोन की ब्याज दर बढ़ने पर परिवार की ईएमआई का बोझ बढ़ जाता है।

किस देश पर कितना कर्ज?

अमेरिका: करीब 3,933 लाख करोड़ रुपये
चीन: 2,137.5 लाख करोड़ रुपये
जापान: 826.5 लाख करोड़ रुपये
ब्रिटेन: करीब 418 लाख करोड़ रुपये
फ्रांस: 399 लाख करोड़ रुपये
इटली: 351.5 लाख करोड़ रुपये
जर्मनी: 332.5 लाख करोड़ रुपये
भारत: करीब 323 लाख करोड़ रुपये
कनाडा: 275.5 लाख करोड़ रुपये
ब्राजील: 247 लाख करोड़ रुपये

भारत की स्थिति अलग क्यों है?

भारत पर कुल सरकारी कर्ज (केंद्र + राज्य) जीडीपी का करीब 83 प्रतिशत है। जापान में यह अनुपात करीब 199 प्रतिशत, अमेरिका में 127 प्रतिशत और फ्रांस में 118 प्रतिशत है। सिर्फ कुल कर्ज देखने से स्थिति साफ नहीं होती। असल में ब्याज चुकाने की क्षमता, आर्थिक विकास दर और कर्ज की लागत ज्यादा मायने रखती है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में अमेरिका और चीन जैसे देशों के बढ़ते सार्वजनिक कर्ज को गंभीर खतरा बताया है। भारत के कर्ज का बड़ा हिस्सा रुपये में है और बाहरी कर्ज जीडीपी का सिर्फ करीब 19 प्रतिशत है। इससे मुद्रा जोखिम कम रहता है। IMF का अनुमान है कि भारत का कर्ज-से-जीडीपी अनुपात 2031 तक घटकर करीब 75 प्रतिशत रह सकता है। सरकार राजकोषीय घाटा कम करने और कर्ज नियंत्रण पर जोर दे रही है।

वैश्विक चुनौती

IMF के अनुसार वैश्विक सार्वजनिक कर्ज अब ऐतिहासिक ऊंचाई पर है और औसत कर्ज जीडीपी के करीब 100 प्रतिशत पहुंच रहा है। विकसित देशों में सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दरें बढ़ने से चुनौतियां और बढ़ गई हैं। ब्याज भुगतान में ज्यादा पैसा जाने से कई सरकारों के लिए विकास योजनाओं पर खर्च करना मुश्किल हो रहा है।

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