रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार का बिजली विभाग अब सरकारी दफ्तरों और शासकीय भवनों से बकाया बिजली बिल (Bijli Bill) की वसूली के लिए प्रीपेड बिलिंग सिस्टम लागू करने जा रहा है। यह जानकारी ऊर्जा विभाग के सचिव एवं बिजली कंपनियों के चेयरमैन डॉ. रोहित यादव ने विभागीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।
डॉ. यादव ने बताया कि बिजली कंपनियों को सरकारी विभागों से करीब 2,800 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त करनी है, लेकिन समय पर वसूली नहीं हो पाने से कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। कई विभागों के बिल लंबे समय तक लंबित रहते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए प्रीपेड बिलिंग सिस्टम लागू किया जाएगा, जिसके तहत जितनी राशि अग्रिम जमा होगी, उतनी ही बिजली की खपत संभव होगी।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आईएएस एसोसिएशन पर ही लगभग एक करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है, जिसका भुगतान अब तक नहीं हुआ है।
प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत प्रदेश में 1.47 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से लगभग 33 हजार सोलर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं।
बिजली बिल हाफ योजना में छूट कम किए जाने के बाद इस योजना के तहत आवेदन संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।
डॉ. रोहित यादव ने कहा कि प्रदेश को देश की “ऊर्जा राजधानी” बनाने की दिशा में व्यापक कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। राज्य पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता कम कर आधुनिक, स्वच्छ और स्मार्ट ऊर्जा तंत्र की ओर बढ़ रहा है।
राज्य की वर्तमान स्थापित उत्पादन क्षमता लगभग 30,671 मेगावाट है। आने वाले वर्षों में 32,100 मेगावाट की नई परियोजनाओं के लिए एमओयू किए गए हैं, जिनमें थर्मल, न्यूक्लियर, सोलर और पम्प स्टोरेज परियोजनाएं शामिल हैं।
ऊर्जा उत्पादन के साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क को भी मजबूत किया जा रहा है। जनवरी 2026 तक उपकेंद्रों की संख्या बढ़कर 137 हो चुकी है। पिछले दो वर्षों में 5 नए उपकेंद्र जोड़े गए हैं।
प्रदेश में कुल उपभोक्ता संख्या 65.6 लाख से अधिक हो गई है, जबकि अधिकतम बिजली मांग 7,003 मेगावाट तक पहुंच चुकी है।
राज्य सरकार 2027-28 तक 2,000 MWh बैटरी स्टोरेज सिस्टम स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। कोरबा में 500 MWh बीईएसएस और फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
सोलर सिंचाई, सोलर पेयजल और सोलर हाईमास्ट योजनाओं के तहत भी हजारों इकाइयां स्थापित की जाएंगी।
बिलासपुर और रायपुर में हजारों किलोमीटर ओवरहेड बिजली लाइनों को अंडरग्राउंड किया जाएगा। रायपुर में 7,600 करोड़ रुपये और बिलासपुर में 3,100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं के क्रियान्वयन से प्रदेश में न केवल ऊर्जा उत्पादन क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि होगी, बल्कि उद्योग, कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं को भी विश्वसनीय एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी।










