लेंस डेस्क। गाजा से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें राहत शिविर में खेलते बच्चे गुड़िया को कंधे पर उठाकर अंतिम संस्कार का अभिनय कर रहे हैं। वे ठीक वही दोहरा रहे हैं, जो रोज अपने आसपास देखते आए हैं। मौत अब उनके खेल का हिस्सा बन चुकी है।
एक फिलिस्तीनी कंटेंट क्रिएटर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि बच्चे गुड़िया को स्ट्रेचर जैसी पाइपों पर रखकर उसे ले जा रहे हैं, जैसे कोई शव हो। यह दृश्य गाजा में युद्ध के बच्चों पर पड़ रहे गहरे मनोवैज्ञानिक प्रभाव को उजागर करता है।
युद्ध धीरे-धीरे रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डाल रहा है, यहां तक कि बच्चों के खेलने के तरीके को भी। गाजा पट्टी में हालात बेहद गंभीर हैं। राहत शिविरों में चारों तरफ मायूसी और सन्नाटा छाया हुआ है।
इसी तरह, ईरान के मिनाब में फरवरी 2026 में अमेरिकी मिसाइल हमले में एक स्कूल पर हमला हुआ, जिसमें डेढ़ सौ से अधिक बच्चे समेत 168 से ज्यादा लोग मारे गए। उस अंतिम संस्कार के वीडियो ने दुनिया भर में अमन और इंसानियत के पक्षधरों की आंखें नम कर दी थीं। गाजा में तो स्थिति और भी बदतर है।
इजरायली हमलों में 64,000 से अधिक बच्चे मारे जा चुके हैं। 56,000 से अधिक बच्चों ने अपने माता-पिता में से एक या दोनों को खो दिया है, जिससे गाजा दुनिया का सबसे बड़ा अनाथ संकट बन गया है।
कुपोषण और भुखमरी का संकट
संयुक्त राष्ट्र की Integrated Food Security Phase Classification (IPC) की दिसंबर 2025 रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2025 के सीजफायर के बाद गाजा में भुखमरी (famine) को कुछ हद तक टाल दिया गया है, लेकिन स्थिति अभी भी बेहद नाजुक है। पूरे गाजा में 77% आबादी यानी करीब 16 लाख लोग अभी भी उच्च स्तर की खाद्य असुरक्षा (acute food insecurity) का सामना कर रहे हैं।
IPC की चेतावनी है कि अक्टूबर 2026 तक 1 लाख से अधिक बच्चे कुपोषण (acute malnutrition) के शिकार रह सकते हैं, जिनमें 31,000 से ज्यादा गंभीर कुपोषण के मामले हैं।
यूनिसेफ की रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 में 95,000 से अधिक बच्चों में कुपोषण के मामले दर्ज हुए। जुलाई-अगस्त 2025 में हर महीने 9,000 से 14,000 बच्चों को कुपोषण के इलाज के लिए भर्ती किया गया। WHO के अनुसार, जुलाई 2025 तक भुखमरी से जुड़ी 74 मौतें हुईं, जिनमें ज्यादातर बच्चे थे।
स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं का हाल
गाजा में केवल 1% स्वास्थ्य केंद्र ही पूरी तरह काम कर रहे हैं। 97% स्कूल क्षतिग्रस्त या नष्ट हो चुके हैं। पानी और सैनिटेशन की भारी कमी से बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। परिवार बाजार से खाना खरीदने में असमर्थ हैं, जिससे बच्चे मुख्य रूप से ब्रेड और चावल पर निर्भर हैं। युद्ध ने खेती, बेकरी, पानी की आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं को तबाह कर दिया है। ब्लॉकेड और बमबारी से जरूरी सामग्री पहुंचना मुश्किल हो गया है।
मदद पहुंच रही है, लेकिन काफी नहीं
दुनिया भर से मानवीय सहायता पहुंच रही है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र खुद मानता है कि यह मदद सिर्फ जीवन बचाने के लिए है, पूर्ण रिकवरी के लिए पर्याप्त नहीं। वितरण में बाधाएं हैं क्योंकि बुनियादी ढांचा नष्ट हो चुका है। कई जगहों पर केवल आधा राशन ही पहुंच पा रहा है।
यूनिसेफ के अनुसार, कुपोषित बच्चों को लंबे समय तक देखभाल की जरूरत है। पूर्ण रिकवरी में सालों लग सकते हैं। शिक्षा व्यवस्था 5 साल पीछे चली गई है। अगर बड़े पैमाने पर निरंतर मदद न मिली तो भुखमरी दोबारा लौट सकती है।
बच्चों का भविष्य खतरे में
गाजा के बच्चे आज भूख और युद्ध की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। वे सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि गाजा के भविष्य हैं। युद्ध ने उन्हें ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है जहां बचपन की मासूमियत खत्म हो चुकी है।
दुनिया को अब सिर्फ अल्पकालिक मदद नहीं, बल्कि स्थायी समाधान देने की जरूरत है। उम्मीद है कि गाजा से आने वाला यह झकझोर देने वाला वीडियो आखिरी हो। अगली बार जब दुनिया गाजा के बच्चों का वीडियो देखे, तो उनके चेहरों पर खुशहाली की मुस्कान हो, न कि मौत का साया।










