रायपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट और राज्य की बार संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के पूर्व महाधिवक्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखकर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन और छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल में महिलाओं के लिए न्यूनतम 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
उन्होंने अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों और टिप्पणियों का हवाला देते हुए इसे संवैधानिक मूल्यों की पूर्ति के लिए आवश्यक बताया है।
पूर्व एजी सतीश चंद्र वर्मा ने पत्र में उल्लेख किया है कि सुप्रीम कोर्ट ने बार एसोसिएशनों की कार्यकारिणी समितियों में महिलाओं को कम से कम एक-तिहाई प्रतिनिधित्व देने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
शीर्ष अदालत का कहना है कि बार एसोसिएशन जैसे स्वैच्छिक संगठन लैंगिक समानता की अनदेखी नहीं कर सकते और बार नेतृत्व में महिलाओं का लंबे समय से रहा कम प्रतिनिधित्व लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
पत्र में सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया है कि ‘संवैधानिक लोकतंत्र’ की भावना को साकार करने और बार संस्थाओं में ऐतिहासिक असंतुलन को दूर करने के लिए महिला आरक्षण अनिवार्य है।
पत्र के जरिए बताया कि अदालत ने केवल सामान्य सदस्यता ही नहीं, बल्कि कार्यकारिणी में कम से कम एक महत्वपूर्ण पदाधिकारी पद जैसे सचिव या कोषाध्यक्ष महिलाओं के लिए रोटेशन के आधार पर आरक्षित किया जाने का निर्देश दिया है।
पूर्व महाधिवक्ता ने यह भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य और जिला स्तर की बार परिषदों में महिलाओं के लिए 30 से 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। ऐसे में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट बार एसोसिएशन और स्टेट बार काउंसिल में भी इन निर्देशों को लागू करना आवश्यक हो गया है।
अपने पत्र के माध्यम से सतीश चंद्र वर्मा ने रजिस्ट्रार जनरल से आग्रह किया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि छत्तीसगढ़ की बार संस्थाओं में महिला अधिवक्ताओं को निर्णयकारी भूमिका में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
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