रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के लाभांडी स्थित आबकारी भवन में शनिवार-रविवार की दरमियानी रात आग लग गई है। आग उसी दफ्तर में लगी, जहां छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन के वे रिकॉर्ड रखे थे, जिनका सोमवार से ऑडिट होना था। लेकिन, ऑडिट से पहले ही सरकारी शराब की खरीदी-बिक्री से जुड़े कागजात जलकर राख हो गए।
ऐसे में यह आगजनी सिर्फ हादसा नहीं लग रही है। ऑडिट होने वाले दफ्तर में आग लगना, कहीं न कहीं शराब घोटाले की ओर इशारा कर रहे हैं।
दिनभर आबकारी विभाग की तरफ से इस पर कोई बयान नहीं आया और न ही अफसरों ने कोई फोन उठाए। दिनभर की खामोशी के बाद आबकारी विभाग ने रविवार शाम करीब 7 बजे अधिकृत बयान जारी किया। विभाग के मुताबिक यह आग बिजली के शॉर्ट सर्किट से लगी थी, जिसमें कार्यालय में रखे कंप्यूटर, प्रिंटर और यूपीएस जल गए। विभाग ने सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित बताया है।
जारी बयान में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के कार्यालय के एक कक्ष में लगी आग पर मौके पर तैनात गार्ड और स्टाफ ने भवन में मौजूद अग्निरोधक उपकरणों की मदद से तत्काल काबू पा लिया। दस्तावेज लोहे की अलमारियों में बंद होने के कारण सुरक्षित रहे। घटना की सूचना मिलते ही उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचे और निरीक्षण किया। रविवार सुबह दोबारा किए गए अवलोकन में भी किसी आवश्यक दस्तावेज को नुकसान नहीं होने की पुष्टि की गई। विभाग का कहना है कि आग से किसी अन्य कक्ष या सामग्री को कोई क्षति नहीं पहुंची है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शनिवार रात करीब 9 बजे आबकारी भवन की तीसरी मंजिल से आग की लपटें उठती दिखीं। फायर ब्रिगेड को बुलाया गया, लेकिन आग बुझते-बुझते आधी रात हो गई। तब तक हॉलनुमा कमरे में रखी फाइलें पूरी तरह जल चुकी थीं। इमारत की बाहरी दीवारों पर पड़े काले निशान भयंकर आग की गवाही दे रहे हैं।
हैरानी यहीं खत्म नहीं होती। इतनी बड़ी घटना के बावजूद पुलिस को आग की कोई सूचना नहीं दी गई। न एफआईआर, न मर्ग, न प्रारंभिक जांच।
जानकारी के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष की शराब बिक्री का पूरा लेखा-जोखा इसी दफ्तर में रखा था। आबकारी विभाग प्रदेश के राजस्व का बड़ा हिस्सा संभालता है। ऐसे में अहम दस्तावेजों का नष्ट होना सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि षड्यंत्र को भी उजागर कर रहा है।
ऑडिट से ठीक पहले लगी आग ने इस पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।
बता दें कि सरकारी दफ्तरों में लगी आग का यह सिलसिला नया नहीं है। पिछले महीने रायपुर के जिला शिक्षा कार्यालय में भी रात में आग लगी थी, जिसमें स्कूलों के कई दस्तावेज नष्ट हो गए थे। तब भी विपक्षी कांग्रेस ने इसे साजिश बताया था और अब आबकारी भवन में स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन के दफ्तर में आग लगने से भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
आग लगने की असली वजह क्या थी? रिकॉर्ड जलने के बाद भी पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गई? सोमवार से प्रस्तावित ऑडिट अब किन दस्तावेजों के आधार पर होगा? क्या डिजिटल बैकअप था या वह भी नहीं बचा?
सवाल यह भी है कि यह आग महज एक संयोग थी या सबूत मिटाने की तैयारी?









