नई दिल्ली। आखिर क्या है ऑपरेशन हार्ड बॉल? गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ अमरीकी जांच एजेंसी FBI के बड़े खुलासे का क्या भारत अमरीका संबंधों पर भी असर पड़ेगा? लॉरेंस बिश्नोई को अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट का सरगना बताने वाली FBI भारत में गुजरात की एक जेल में बन्द इस कुख्यात गैंगस्टर पर क्या कार्रवाई करेगी? अमेरिका लॉरेंस के प्रत्यर्पण की मांग कर चुका है, प्रक्रिया शुरू हो गई है भारत इसका क्या जवाब देगा? खुद को राष्ट्रवादी कहने वाले लॉरेंस बिश्नोई के प्रत्यर्पण को क्या भारत राजी होगा? अमेरिका ने 26/11 मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा का प्रत्यर्पण कर दिया था। वो भारत की जेल में है। भारत यदि बिश्नोई का प्रत्यर्पण करता है तो उसके मायने क्या होंगे? सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि गुजरात की साबरमती जेल में बंद यह गैंगस्टर आखिर अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट चला कैसे रहा है? FBI के पास सबूतों के तौर पर आखिर क्या जानकारियां हैं जिससे भारत में हड़कंप मचा हुआ है?

ऐसे ढेर सारे सवाल हैं। हम अपनी इस रिपोर्ट में करेंगे परत दर परत खुलासा।
भारत से दुनिया भर में ऑपरेट कर रहे गैंगस्टरों को लेकर अमेरिकन FBI के ऑपरेशन हार्ड बॉल से जुड़े खुलासों के बाद देश भर में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं देश की इंफोर्समेंट एजेंसियों की साख को गहरा धक्का लगा है।
चौंका देने वाला पहलू यह है कि जिन अपराधियों के नाम अमेरिकी नागरिकों से फिरौती वसूल करने को लेकर सामने आए हैं उनमे से ज्यादातर भारतीय जेलों में बंद हैं या फिर भारतीय पुलिस से जुड़े हुए हैं।
ऐसा नहीं है कि केवल FBI ने इन पर यह आरोप लगाए हैं, सच्चाई यह है कि कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर समेत अन्य देशों में भी इनके द्वारा किए गए अपराधों की बड़ी फेहरिस्त है।
अब तक 24 की गिरफ्तारी 37 पर मुकदमा

7 जुलाई को अमेरिका के लॉस एंजिल्स में FBI और US के जस्टिस विभाग (DOJ) ने ‘Operation Hard Ball’ नामक एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अभियान की घोषणा की। यह भारत-आधारित तीन ट्रांसनेशनल संगठित अपराध समूहों के खिलाफ वर्षों तक चली जांच का नतीजा था।
इस कार्रवाई में अमेरिका, कनाडा और यूरोप में 24 लोगों की गिरफ्तारी हुई, जबकि तीन अलग-अलग इंडिक्टमेंट्स में कुल 37 आरोपियों पर मुकदमा चलाया गया। ये समूह मुख्य रूप से भारत से जुड़े हैं और इनको लीड लारेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया जैसे अपराधी भारत की जेलों में बंद होने के बावजूद संचालित कर रहे थे। लारेंस 2015 से गुजरात में बंद है। जग्गू भगवानपुरिया को 2015 में गिरफ्तार किए जाने के बाद पहले बठिंडा जेल में रखा गया था। बाद में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने उसे असम के सिल्चर सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया था।
इंडिक्टमेंट के अनुसार वह स्मगल्ड सेलफोन और वॉइस-ओवर-इंटरनेट डिवाइस के जरिए जेल से ही वैश्विक अपराध नेटवर्क चला रहा था। उसके सहयोगी गोल्डी बरार और रोहित गोदारा ने उत्तरी अमेरिका और यूरोप में संचालन संभाला।
इस समूह के 1000 से ज्यादा एसोसिएट्स हैं, जिनमें 100 से ज़्यादा अमेरिका में। खास बात: जो सामने आई है वो यह है कि इस समूह ने भारतीय कानून एजेंसियों को भ्रष्ट किया। झूठी सूचना देकर प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ बेबुनियाद केस दर्ज कराए और उनसे वसूली की।
पंजाब पुलिस के एक अफसर ने कैसे वसूले 4 लाख डॉलर?
FBI ने जो खुलासा किया है, उसमें पंजाब पुलिस के इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह नागरा का नाम भी है। नागरा का नाम अंतरराष्ट्रीय एक्सटॉर्शन रैकेट में लिया है। अमेरिकी अधिकारियों ने उन पर $400,000 के एक्सटॉर्शन मामले में शामिल होने का आरोप लगाया है। आरोप है कि वे लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया गैंग के साथ मिलकर अमेरिका में बसे परिवारों को निशाना बनाते थे।

गुरिंदरजीत सिंह पर भगवानपुरिया गैंग के साथ मिलकर अमेरिका में रहने वाले एक परिवार से 4 लाख डॉलर की रंगदारी वसूलने और झूठे केस में फंसाने का आरोप है। उस वक्त वे टांडा, होशियारपुर के SHO थे। लॉस एंजिल्स में अमेरिकी अटॉर्नी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा है कि उन्हें चार्ज किया जा चुका है और अमेरिका उनका प्रत्यर्पण कराएगा।
सोशल मीडिया रिपोर्ट्स में उनके एफबीआई जांच में शामिल होने के आरोप लगने के बाद होशियारपुर के सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) ने उन्हें तुरंत होशियारपुर पुलिस लाइंस में ट्रांसफर कर दिया। SSP ने कहा कि यह कदम सतर्कता के तौर पर उठाया गया है और आरोपों की जांच के लिए फैक्ट-फाइंडिंग इंक्वायरी शुरू कर दी गई है।
देश के आंतरिक सुरक्षा तंत्र पर बड़ा सवाल

अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने नवंबर 2023 में एक RAW से जुड़े अधिकारी का नाम लिया। उन पर आरोप लगाया कि उसने अमेरिकी नागरिक पतवंत सिंह पन्नू सिख अलगाववादी की हत्या का प्लॉट रचा। निखिल गुप्ता नाम के व्यक्ति पर भाड़े के हत्यारे के रूप में काम करने का आरोप लगा। इससे भी भारत सरकार ने इंकार किया। लेकिन गजब तब हुआ जब निखिल गुप्ता ने मैनहैटन के फेडरल कोर्ट में सुपारी देकर हत्या, हत्या की साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश के आरोपों में दोष स्वीकार किया।

अमेरिका में एफबीआई की यह कार्रवाई भारत की छवि और आंतरिक सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है। लारेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरियाजैसे बड़े अपराधी दशकों से भारतीय जेलों में बंद हैं, फिर भी स्मगल्ड फोन के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हत्या, ड्रग तस्करी और एक्सटॉर्शन का नेटवर्क चला रहे थे। यह स्पष्ट रूप से जेल सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी और तकनीकी नियंत्रण में गंभीर खामियों को दर्शाता है।
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि भारतीय जेल उन्हें रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। अमेरिकी अफसरों का यह बयान भारतीय जेल व्यवस्था की विश्वसनीयता को सीधे प्रभावित करता है। ये समूह भारत में ही बेस्ड हैं और पंजाब-राजस्थान जैसे राज्यों में सक्रिय रहे।
घरेलू स्तर पर इनके खिलाफ कई केस पहले से चल रहे थे, फिर भी इन्हें पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका। विदेशों में इनके नेटवर्क का विस्तार और निज्जर की हत्या जैसे हाई-प्रोफाइल मामले भारतीय खुफिया तंत्र की निगरानी और पूर्वानुमान क्षमता पर सवाल उठाते हैं।
भगवानपुरिया समूह द्वारा भारतीय पुलिस को भ्रष्ट करने का आरोप तो और भी गंभीर हैं जिसमे एक इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर करके जांच बैठा दी गई है।
यह घटना भारत सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और कानून-व्यवस्था की प्रभावशीलता को चुनौती देती है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विश्लेषक इसे भारतीय सुरक्षा तंत्र की कमजोरी के रूप में पेश कर रहे हैं। इससे विदेशी निवेशकों और डायस्पोरा में विश्वास कम हो सकता है। हालांकि, भारत की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, लेकिन ऐसी घटनाएं लंबे समय तक कूटनीतिक और घरेलू बहस का विषय बनी रहेंगी।
कनाडा के बाद अमेरिका के सवाल
FBI और रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस आरसीएमपी ने 2023 में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में लॉरेंस बिश्नोई और उसके गिरोह के खिलाफ जो आरोप लगाए हैं, वे महत्वपूर्ण हैं।

यह एक ऐसा आरोप है जो पहले कनाडाई अधिकारियों द्वारा लगाया गया था और जिसने 2023 में ओटावा और नई दिल्ली के बीच संबंध बेहद खराब दौर में पहुंच गए थे। कनाडा और भारत के इन आरोपों प्रत्यारोपों के बीच अपने-अपने काउंसलेट में सदस्यों की संख्या कम कर दी थी।
मंगलवार को खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की मौत की संयुक्त जांच को लेकर भी FBI का बयान सामने आया। अमेरिका और कनाडा ने बिश्नोई और उसके गिरोह के सदस्यों के खिलाफ अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए।
FBI और RCMP ने उन पर हत्या, गोलीबारी, जबरन वसूली और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे कई गंभीर मामलों में शामिल होने की बात भी कहीं।
कनाडा ने लगाए थे राजनयिकों पर गंभीर आरोप

नहीं भुला जाना चाहिए कि कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सितंबर 2023 में संसद में कहा था कि हमारी एजेंसियां निज्जर मामले के यह जांच कर रही हैं कि इंडियन एजेंट्स का उनकी हत्या में लिंक है। निज्जर की जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया में गोली मारकर हत्या हुई थी। ट्रुडो ने इसे एक विदेशी सरकार द्वारा की गई हत्या बताया था। जिसे भारत सरकार ने सीधे नकार दिया था।
उस समय, भारत सरकार और उसके अधिकारियों, जिनमें कनाडा के तत्कालीन उच्चायुक्त संजय वर्मा भी शामिल थे, पर चौंकाने वाले आरोप लगाए गए थे।
FBI की जांच रिपोर्ट में निज्जर की हत्या का भारत सरकार के अधिकारियों या उसकी एजेंसियों से कोई संबंध नहीं बताया गया।
इससे कनाडा और भारत के बीच एक बड़ा राजनयिक विवाद खड़ा हो गया था।
क्या भारत लॉरेंस और भगवानपुरिया का प्रत्यर्पण करेगा?
प्रत्यर्पण संधि के तहत अमेरिका ने 26/11 के आरोपी आतंकी तहव्वुर हुसैन राणा को भारत को सौंपा था। FBI ने जिस तरह से इम मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर लॉरेंस गैंग और भगवानपुरिया का नाम लिया है और प्रत्यर्पण की मांग की है। क्या भारत लॉरेंस बिश्नोई और भगवानपुरिया को प्रत्यर्पण करेगा?

सत्ता के गलियारों में इसे लेकर चर्चा है कि यदि ऐसा होता है तो आशंका है कि यह बात बहुत दूर तक न चली जाए।
अपनी धरती पर भारतीय गैंगस्टर्स के कथित आपराधिक को लेकर कनाडा और भारत के संबंध पहले ही तनाव पूर्ण हो चुके हैं। अब इन्हीं गैंगस्टर्स के खिलाफ अमेरिका में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद क्या भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर पड़ेगा?
महत्वपूर्ण है कि अमेरिकी अभियोजकों और सुरक्षा एजेंसियों ने कहा है कि वे इन दोनों गैंगस्टर्स लारेंस और भगवानपुरिया के प्रत्यर्पण के लिए भारत सरकार से औपचारिक रूप से संपर्क करने की योजना बना रहे हैं ताकि उन पर अमेरिका में जबरन वसूली और रैकेटियरिंग के तहत मुकदमा चलाया जा सके।








