इथियोपिया का 12 हजार साल पुराना ज्वालामुखी फटा, राख का बादल 4300 किमी दूर दिल्ली तक पहुंचा

November 25, 2025 6:04 PM
Ethiopia Heli Gubbi volcano

Ethiopia Heli Gubbi volcano: इथियोपिया के अफार क्षेत्र में स्थित हेली गुब्बी ज्वालामुखी रविवार को अचानक फट गया। यह ज्वालामुखी पिछले लगभग 12 हजार साल से पूरी तरह शांत था और इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं था। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि राख का गुबार 15 किलोमीटर तक ऊपर उठ गया। हवा के साथ यह राख लाल सागर पार करके यमन, ओमान और फिर सोमवार रात तक भारत के कई हिस्सों तक पहुंच गई। राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और गुजरात के ऊपर से यह बादल गुजरा। अब यह राख का गुबार भारत से आगे चीन की ओर बढ़ रहा है।

अच्छी बात यह है कि अब तक इस विस्फोट से किसी के मारे जाने या घायल होने की कोई खबर नहीं है। यमन और ओमान की सरकारों ने लोगों से कहा है कि जो सांस की बीमारी से पीड़ित हैं वे विशेष सावधानी रखें क्योंकि राख और सल्फर डाइऑक्साइड हवा में मिले हैं।

उड़ानों पर बड़ा असर

ज्वालामुखी की राख विमानों के इंजन के लिए खतरनाक होती है। इस वजह से भारत में कई उड़ानें रद्द करनी पड़ीं या उनका रास्ता बदला गया। एअर इंडिया ने 11 उड़ानें रद्द कीं, अकासा एयर, इंडिगो और केएलएम ने भी कई फ्लाइट्स कैंसिल कीं, जेद्दा, कुवैत, अबू धाबी और एम्स्टर्डम जैसी उड़ानें प्रभावित हुईं
इसके बाद भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने तुरंत एडवाइजरी जारी की। इसमें कहा गया:
राख वाले इलाके से पूरी तरह बचें
उड़ान का रास्ता बदलें
अगर इंजन में कोई गड़बड़ी या केबिन में धुएं जैसी गंध आए तो तुरंत रिपोर्ट करें

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राख बहुत ऊंचाई (25,000 से 45,000 फीट) पर थी इसलिए जमीन पर उतरने-उड़ने में ज्यादा खतरा नहीं था फिर भी पूरी सतर्कता बरती गई।

वैज्ञानिक हैरान, नया अध्ययन शुरू होगा

वैज्ञानिकों के लिए यह घटना बहुत खास है। अफार क्षेत्र में धरती की प्लेटें धीरे-धीरे अलग हो रही हैं। ऐसे में इतने लंबे समय बाद एक अनजाना ज्वालामुखी का जागना कई सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड निकलने से लगता है कि ज्वालामुखी के अंदर अभी भी दबाव है। आने वाले दिनों में दोबारा विस्फोट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। शोधकर्ता अब हेली गुब्बी को नजदीक से समझने की तैयारी कर रहे हैं। सैटेलाइट तस्वीरों और दूरसंवेदी तकनीक से इसकी निगरानी की जा रही है।

राख बहुत ऊंचाई पर होने की वजह से आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। मंगलवार सुबह कुछ जगहों पर सूरज लाल-नारंगी दिखाई दिया, जो राख के कणों की वजह से था। अब स्थिति सामान्य हो रही है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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