West Bengal election 2026: कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में राज्य विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और नौकरशाहों के स्थानांतरण संबंधी चुनाव आयोग के आदेशों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया।चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच ने आज फैसला सुनाया। गौरतलब है कि चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी से बाहर किया गया है।
वकील अर्का कुमार नाग द्वारा दायर की गई पीआईएल में यह चिंता जताई गई थी कि ईसीआई ने पश्चिम बंगाल में लगभग पूरी वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस नौकरशाही के बड़े पैमाने पर स्थानांतरण और हटाने का आदेश दिया है।ईसीआई ने हाल ही में चीफ सेक्रेटरी, डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी), होम सेक्रेटरी, विभिन्न जिला मजिस्ट्रेटों (डीएम), पुलिस अधीक्षकों (एसपी) और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) तथा भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण का आदेश दिया था। इसके बाद और अधिक अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया।
नाग ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के एक बड़े समूह को चुनाव पर्यवेक्षक कर्तव्यों के लिए तमिलनाडु, केरल और नागालैंड जैसे अन्य राज्यों में स्थानांतरित कर दिया गया है।उन्होंने तर्क दिया कि विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की प्रशासनिक मशीनरी का यह “थोक में विघटन” संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत शक्ति का सही इस्तेमाल नहीं है, बल्कि यह एक दंडात्मक कदम है।पीआईएल में यह भी कहा गया कि ऐसे कदम जनहित के लिए बेहद हानिकारक हैं और संघीय सिद्धांतों का मौलिक उल्लंघन करते हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि चुनाव से जुड़े नहीं होने वाले अधिकारियों को भी अलग-अलग राज्यों में भेज दिया गया है।”पांच राज्य चुनाव में जा रहे हैं, वे 18 शेष राज्यों से ले सकते हैं। अगर संस्थानों के प्रमुख को भेज दिया जाता है, तो राज्य में विकास का क्या होगा?”
चुनाव की घोषणा के तत्काल बाद पश्चिम बंगाल के डीजीपी और चीफ सेक्रेटरी का तबादला कर नई नियुक्ति की गई। अब रविवार को एक साथ 267 अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी से हटा दिया गया। इसमें 170 पुलिस अधिकारी और 83 बीडीओ है।बात यही नहीं रुकी कल मुख्य निर्वाचन अधिकारी के ऑफिस से चार IAS की छुट्टी कर दी गई।









