रायपुर | रायपुर में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय PRSU की एक भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स एवं लेज़र टेक्नोलॉजी विषय में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति के लिए 30 जनवरी 2026 को हुए साक्षात्कार में कई नियमों के उल्लंघन का दावा किया जा रहा है। अभ्यर्थियों और सूत्रों के अनुसार, यह प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण और पूर्वनियोजित तरीके से चलाई गई जिससे योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ है।
भर्ती प्रक्रिया का विवरण
विश्वविद्यालय ने 2023 और 2024 में दो अलग-अलग विज्ञापन जारी किए थे। एक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं फोटॉनिक्स विभाग के लिए और दूसरा इनोवेटिव प्रोग्राम M.Tech. ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स एवं लेज़र टेक्नोलॉजी के लिए। यह M.Tech. कोर्स AICTE से मान्यता प्राप्त है, इसलिए इसमें AICTE के नियम पूरी तरह लागू होते हैं। करीब 35 आवेदन आए थे। शुरुआत में विश्वविद्यालय ने 7 जनवरी 2026 को पात्र-अपात्र सूची जारी की, जिसमें M.Sc. इलेक्ट्रॉनिक्स वाले उम्मीदवारों को पात्र बताया गया लेकिन M.Sc. फिजिक्स वालों को अपात्र करार दिया। आपत्तियों के बाद सभी को पात्र घोषित कर इंटरव्यू के लिए बुला लिया गया।

मुख्य आरोप – AICTE नियमों का उल्लंघन
M.Tech. प्रोग्राम में पढ़ाने वाले शिक्षक के लिए संबंधित क्षेत्र में M.Tech. या M.E. डिग्री अनिवार्य है लेकिन कई उम्मीदवारों के पास केवल M.Sc. डिग्री है या फिर माइक्रोवेव इंजीनियरिंग, VLSI डिजाइन, सिग्नल प्रोसेसिंग, इमेज प्रोसेसिंग जैसे असंबद्ध विषयों में M.Tech./Ph.D. है। ऐसे उम्मीदवारों को बुलाना और चयन का रास्ता साफ करना नियमों के खिलाफ माना जा रहा है। देश के बड़े संस्थानों जैसे CUSAT (कोचीन) में भी इसी तरह के सख्त मानक अपनाए जाते हैं।
पक्षपात और पूर्वनियोजित चयन
छत्तीसगढ़ के कई योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध हैं जिनके पास ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स/लेज़र टेक्नोलॉजी में M.Tech. और Ph.D. दोनों हैं। फिर भी अन्य राज्यों से असंबद्ध योग्यता वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का आरोप है। इससे स्थानीय प्रतिभाशाली युवाओं के साथ अन्याय होने का दावा किया जा रहा है।
चयन समिति में गड़बड़ी
छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम के अनुसार चयन समिति में बाहरी विशेषज्ञों का होना जरूरी है जिनका विश्वविद्यालय से कोई पूर्व संबंध न हो लेकिन एक विशेषज्ञ सदस्य डॉ. संजीव टोकेकर (DAVV, इंदौर) को शामिल किया गया, जो पहले इसी विश्वविद्यालय में 2006-2010 तक RDC सदस्य रह चुके हैं। साथ ही उनकी विशेषज्ञता कंप्यूटर नेटवर्किंग में है जो ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स से बिल्कुल अलग है। इससे समिति का गठन अवैध बताया जा रहा है।
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अभ्यर्थियों की मांग
प्रभावित अभ्यर्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और राजभवन से मांग की है कि –
30 जनवरी 2026 का पूरा साक्षात्कार रद्द किया जाए।
चयन समिति का पुनर्गठन नियमों के अनुसार हो।
AICTE मानकों के हिसाब से नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भर्ती से जुड़े कुछ नोटिस और सूचियां उपलब्ध हैं लेकिन आरोपों पर अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह मामला शिक्षा की गुणवत्ता और निष्पक्ष भर्ती से जुड़ा होने के कारण गंभीर माना जा रहा है। द लेंस ने इस मुद्दे को पहले भी उठाया था और जानकारों ने भी इस भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाये थे।







