नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार दूसरे दिन भी भारी हंगामा और प्रदर्शन जारी रहा। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं ने रविवार को रिहाई के बाद केंद्र सरकार पर तीखे हमले किए और देश में आपातकाल (इमरजेंसी) जैसे हालात होने का दावा किया। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए दिल्ली में आवाजाही और प्रदर्शनकारियों की अवैध हिरासत पर सख्त निर्देश जारी किए हैं।
23 घंटे हिरासत में रहने के बाद छूटे CJP नेता, सरकार पर साधा निशाना
CJP के प्रमुख नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके को करीब 23 घंटे तक पुलिस हिरासत में रखने के बाद रविवार सुबह रिहा किया गया। रिहाई के तुरंत बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए सौरव दास ने आरोप लगाया कि शनिवार को उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से उतरते ही किडनैप की तर्ज पर हिरासत में ले लिया गया था।
सौरव दास ने कहा, “देश में 1975 जैसे आपातकाल के हालात हैं। सरकार अपने ही नागरिकों के खिलाफ जंग लड़ रही है।” उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए पूरे देश और दिल्ली में डर का माहौल क्यों बनाया जा रहा है। वहीं CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के आदेश आखिर किसने दिए थे।
दिल्ली में भारी पुलिस बल तैनात, SFI के दर्जनों कार्यकर्ता हिरासत में
दिल्ली में धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू होने के बीच रविवार को भी प्रदर्शन का सिलसिला जारी रहा। जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के अखिल भारतीय अध्यक्ष आदर्श एम. साजी समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं को राजीव चौक के पास से हिरासत में ले लिया गया। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती के बावजूद CJP और अन्य संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।
सुप्रीम कोर्ट सख्त: ‘नागरिकों की अवैध हिरासत पर लगे रोक’
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई, जहाँ अदालत ने आम नागरिकों और वकीलों की सहूलियत के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए:
अवैध हिरासत पर रोक: सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि जो लोग प्रतिबंधित क्षेत्रों से बाहर शांतिपूर्ण और बिना हथियार के प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें पुलिस हिरासत में न लिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट परिसर से हटे बोर्ड: अदालत ने अपने परिसर के आसपास लगे धारा 163 के नोटिस बोर्ड हटाने के निर्देश दिए, ताकि आम लोगों और वकीलों को न्याय तक पहुंचने में कोई बाधा न आए।
मेट्रो स्टेशन बंद करने पर मांगा जवाब: DMRC द्वारा प्रदर्शन के दौरान 45 मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए मेट्रो का पूरा मैप पेश करने को कहा है।
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को आश्वस्त किया कि दिल्ली में इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई हैं, मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चालू हैं।







