चीन की अदालत का बड़ा फैसला:  अब एआई नहीं खा पाएगा नौकरियां

Chinese court big decision

लेंस डेस्‍क। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश में मजदूर हितों को लेकर अदालत का एक राहत भरा फैसला आया है। पेशेवर कामों बढ़ते एआई के दखल के बाद भी चीन में अब कर्मचारियों को एआई से बदलना बर्खास्तगी का आधार नहीं बन पाएगा।

हांगझोऊ और बीजिंग की अदालतों ने साफ कर दिया है कि कंपनियां एआई से काम करवाकर कर्मचारियों को बर्खास्त नहीं कर सकतीं, क्योंकि एआई अपनाना एक स्वैच्छिक व्यावसायिक निर्णय है, न कि ऑब्जेक्टिव सर्कमस्टेंसेज में मेजर चेंज जो अनुबंध समाप्त करने का वैध आधार हो।

हांगझोऊ इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट ने अप्रैल में एक प्रमुख मामले में फैसला सुनाया। एक टेक कंपनी के कर्मचारी जो (Zhou), जो एआई बड़े मॉडल के जवाबों की गुणवत्ता जांच का काम करते थे, को कंपनी ने एआई अपनाने के बाद सिर्फ 15,000 युआन की सैलरी पर रखने का ऑफर दिया।  जब कर्मचारी ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, तो कंपनी ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था।

कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कंपनी की बर्खास्तगी को अवैध करार दिया। साथ ही कंपनी को दोगुना मुआवजे का भुगतान करने का आदेश भी दिया।

इससे पहले दिसंबर 2025 में बीजिंग में एक समान मामले में लियू नामक डेटा मैपिंग वर्कर को राहत मिली थी। उनकी कंपनी ने पारंपरिक मैनुअल डेटा कलेक्शन को एआई-आधारित ऑटोमेशन से बदल दिया था। शिन्हुआ  और अन्य सरकारी मीडिया के अनुसार, हांगझोऊ कोर्ट ने “एआई एंटरप्राइजेज और वर्कर्स के अधिकारों की सुरक्षा” पर टिपिकल केस जारी किए, जो 1 मई इंटरनेशनल वर्कर्स डे से ठीक पहले आए।

चीन के लेबर कॉन्ट्रैक्ट लॉ के तहत कंपनियां कर्मचारियों को वैकल्पिक पद, पुनर्प्रशिक्षण या उचित मुआवजा दिए बिना नहीं हटा सकतीं। अदालतों ने जोर दिया कि एआई अपनाना कंपनियों की जिम्मेदारी है वे लागत बचत का बोझ कर्मचारियों पर नहीं डाल सकते।

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