रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा (Justice Ramesh Sinha) ने कहा कि समय के साथ कानून, तकनीक और समाज में लगातार बदलाव हो रहा है। ऐसे में न्यायिक अधिकारियों के लिए जरूरी है कि वे नई कानूनी व्यवस्थाओं और तकनीकी बदलावों की जानकारी लगातार हासिल करते रहें।
छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की ओर से रायपुर संभाग के न्यायिक अधिकारियों के लिए न्यू सर्किट हाउस, रायपुर में एक दिवसीय न्यायिक सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें रायपुर, धमतरी, बलौदाबाजार और महासमुंद जिलों के 141 न्यायिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सेमिनार के मुख्य अतिथि
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ऑनलाइन लेन-देन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ आर्थिक अपराध भी जटिल होते जा रहे हैं। भारतीय न्याय संहिता, 2023 लागू होने के बाद आपराधिक न्याय व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। ऐसे में न्यायिक अधिकारियों को नए प्रावधानों की जानकारी रखने के साथ मामलों में पेश किए गए साक्ष्यों की सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए।
उन्होंने दीवानी मामलों में दस्तावेजी साक्ष्यों के महत्व पर भी जोर दिया। दस्तावेजों की वैधता, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, स्टांप, पंजीयन और आपत्तियों जैसे पहलुओं की सही जांच का फैसले पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
जीरो FIR और ई-FIR से आसान हुई शिकायत
तकनीक के इस्तेमाल पर बात करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जीरो FIR और ई-FIR जैसी व्यवस्थाओं से लोगों के लिए अपराध की शिकायत दर्ज कराना आसान और तेज हुआ है। इससे अपराध का स्थान अलग होने की स्थिति में भी पीड़ित को न्याय व्यवस्था तक पहुंचने में सुविधा मिलती है।
मुख्य न्यायाधीश ने चेक अनादरण यानी चेक बाउंस के मामलों के त्वरित निपटारे की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले अदालतों में लंबित मामलों का बड़ा हिस्सा हैं। इनके निपटारे में वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR), मध्यस्थता और समझौते जैसे तरीकों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इससे अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ कम होगा और पक्षकारों को भी जल्द समाधान मिल सकेगा।
समय पर और पारदर्शी न्याय जरूरी
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्याय व्यवस्था से अब समाज की अपेक्षा केवल सही फैसला देने की नहीं, बल्कि समय पर, पारदर्शी और निष्पक्ष न्याय देने की भी है। सेमिनार का उद्देश्य न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, तकनीक के अनुकूल और आम लोगों के लिए सुलभ बनाना है।
सेमिनार में आर्थिक अपराध, भारतीय न्याय संहिता के बाद की चुनौतियां, दीवानी मामलों में दस्तावेजों की ग्राह्यता, जीरो FIR, ई-FIR, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की वैधता और चेक अनादरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों और न्यायिक अधिकारियों के बीच चर्चा हुई।










