CJP कार्यकर्ता के पिता की हत्या का मामला, स्कूल की पोल खोलने के बाद परिवार पर हमला, अभिजीत दीपके ने की गिरफ्तारी की मांग

पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता शेख अब्दुल हफीज के पिता जनाब माफिक की मौत हो गई है। CJP का आरोप है कि सरकारी स्कूल की बदहाली उजागर करने के बाद स्थानीय लोगों (जिनमें भाजपा कार्यकर्ता बताए गए) ने परिवार पर हमला किया, जिसमें पिता के सिर में गंभीर चोटें आईं।

क्या हुआ था?

13 अगस्त को अब्दुल हफीज (25) ने बांकुरा के इंडस ब्लॉक के करिसुंडा गांव के सरकारी प्राथमिक स्कूल का निरीक्षण किया। यह CJP के देशव्यापी ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का हिस्सा था, जिसमें गांव के स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं (पानी, शौचालय, बेंच आदि) की स्थिति जांची जाती है।

CJP के अनुसार उसी शाम कुछ लोग उनके घर पहुंचे। उन्होंने अब्दुल से माफी का वीडियो बनाने को कहा, जिसमें वह यह कहे कि स्कूल की शिकायत बाहरी दबाव में की गई। इनकार करने पर परिवार पर हमला हुआ। अब्दुल की गर्दन में चोट आई, जबकि उनके पिता के सिर पर गंभीर चोट लगी।

पिता जनाब माफिक का 15 अगस्त को इलाज के दौरान निधन हो गया। अब्दुल ने अस्पताल से वीडियो जारी कर हमले का जिक्र किया और सुरक्षा की वजह से कोलकाता चले गए।

CJP की प्रतिक्रिया

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि बेहतर स्कूल मांगने पर लोगों की हत्या हो रही है। उन्होंने आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की और कहा कि CJP टीम पश्चिम बंगाल जाकर परिवार को न्याय दिलाने की कोशिश करेगी।

सह-संयोजक आशुतोष रांका ने भी आरोप लगाया कि स्कूल सुधार की मांग पर हिंसा हो रही है। उन्होंने बंगाल के कार्यकर्ताओं से बांकुरा पहुंचने की अपील की।

पुलिस का पक्ष

स्थानीय पुलिस ने मौत की पुष्टि की है लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि शिकायत दर्ज होने में देरी हुई या अभी तक औपचारिक शिकायत नहीं मिली। CJP का आरोप है कि पुलिस ने पहले शिकायत दर्ज करने से इनकार किया। जांच जारी है। CJP टीम के बांकुरा पहुंचने के बाद मामला और आगे बढ़ सकता है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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