11,718 करोड़ की लागत से होगी डिजिटल जनगणना, 1 मार्च 2027 को आधी रात से होगी शुरुआत

December 12, 2025 9:31 PM
census in india

नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को 2027 में जनगणना कराने के लिए 11,718 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस निर्णय की घोषणा करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दस-वर्षीय इस प्रक्रिया के महत्व पर जोर देते हुए जनगणना को “भारत के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया” बताया।

पिछली राष्ट्रव्यापी जनगणना 2011 में हुई थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के चलते 2021 की जनगणना स्थगित कर दी गई थी। सरकार ने अब पुष्टि की है कि अगली जनगणना 2027 में होगी, जिसकी संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 को 12 बजे निर्धारित की गई है।

अश्विनी वैष्णव बताया कि भारत पिछले 150 वर्षों से जनगणना के रिकॉर्ड रखता आ रहा है, जो इस ऐतिहासिक डेटाबेस की निरंतरता और महत्व को दर्शाता है। जनगणना 2027 भारत की 16वीं जनगणना होगी और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी, जिसमें संपूर्ण जनसंख्या को शामिल किया जाएगा और आवास, सुविधाओं, जनसांख्यिकी, शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, प्रवासन आदि से संबंधित गांव, शहर और वार्ड स्तर के विस्तृत आंकड़े उपलब्ध कराए जाएंगे। यह प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 द्वारा संचालित होती है।

दो चरणों में होगी जनगणना

वैष्णव ने बताया कि 16 जून, 2025 के राजपत्र में अधिसूचित जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी।

पहला चरण: अप्रैल से सितंबर 2026 तक, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की सुविधानुसार 30 दिनों की अवधि में मकानों की सूची बनाना और आवास जनगणना करना।
चरण दो: जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में आयोजित की जाएगी। लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके क्षेत्रों में, जलवायु संबंधी बाधाओं के कारण यह सितंबर 2026 में आयोजित की जाएगी।

पहली बार डिजिटल जनगणना

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आगे कहा कि आगामी जनगणना भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल एप्लिकेशन (एंड्रॉइड और आईओएस दोनों पर) के माध्यम से डेटा एकत्र किया जाएगा और नव विकसित जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस) पोर्टल के माध्यम से वास्तविक समय में इसकी निगरानी की जाएगी।

उन्होंने कहा कि हाउसलिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर वेब मैप टूल और स्व-गणना का विकल्प जैसी नवीन सुविधाएं भी शुरू की जा रही हैं।जनगणना-आधारित सेवा (CaaS) मंत्रालयों को स्वच्छ, मशीन-पठनीय और कार्रवाई योग्य प्रारूप में डेटा उपलब्ध कराएगी

राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने इससे पहले जनगणना 2027 में जाति गणना को शामिल करने को मंजूरी दी थी। जनसंख्या गणना चरण के दौरान जाति संबंधी आंकड़े इलेक्ट्रॉनिक रूप से एकत्र किए जाएंगे, जो स्वतंत्र भारत की दशकीय जनगणना में इस तरह का पहला अभ्यास होगा।

जनगणना 2027 के लिए राष्ट्रव्यापी जागरूकता, समावेशी भागीदारी, अंतिम छोर तक पहुंच और जमीनी स्तर पर संचालन के लिए समर्थन हेतु एक केंद्रित और व्यापक प्रचार अभियान चलाया जाएगा। इसमें सटीक, प्रामाणिक और समय पर जानकारी साझा करने और समन्वित एवं प्रभावी जनसंपर्क प्रयासों को सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा।

60 लाख फ़ील्डकर्मी होंगे शामिल

इस कार्य में अनुमानित 30 लाख फील्ड कर्मी शामिल होंगे, जिनमें जनगणनाकर्मी, पर्यवेक्षक, मास्टर ट्रेनर और जिला एवं राज्य स्तर के अधिकारी शामिल हैं। अधिकांश जनगणनाकर्मी—मुख्य रूप से सरकारी स्कूल शिक्षक—अपने नियमित कार्य के अतिरिक्त जनगणना संबंधी कार्य करेंगे और सभी फील्ड कर्मियों को इस विशाल अभियान के लिए मानदेय दिया जाएगा।

जनगणना से 1.02 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार सृजित होने की उम्मीद है, क्योंकि डिजिटल संचालन, डेटा प्रबंधन और निगरानी में सहयोग के लिए लगभग 550 दिनों के लिए 18,600 से अधिक तकनीकी कर्मियों को तैनात किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे क्षमता निर्माण में भी योगदान मिलेगा।

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