नई दिल्ली। विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 (FCRA) को लेकर ईसाई समुदाय के प्रमुख संगठन ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन (AICU) ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन ने सरकार से मांग की है कि वह इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों से पूरी तरह वापस ले और भविष्य में चर्च की संपत्तियों व संस्थानों पर नियंत्रण के किसी भी प्रयास से दूर रहने का स्पष्ट लिखित आश्वासन दे।
107 वर्ष पुराना और एशिया का सबसे बड़ा कैथोलिक आमजन संगठन AICU ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि केवल बिल को रोक देना या टाल देना समुदाय के लिए पर्याप्त नहीं है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एलिन्स वाज ने कहा कि यह विधेयक चर्च और उससे जुड़े संस्थानों की स्वायत्तता पर गंभीर असर डाल सकता है।
AICU के अनुसार, 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किए गए इस संशोधन बिल में एक ‘निर्दिष्ट प्राधिकरण’ को व्यापक अधिकार देने का प्रस्ताव है। इसके तहत FCRA के तहत पंजीकृत किसी भी संस्था—जिसमें चर्च, शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, अनाथालय और चैरिटेबल ट्रस्ट शामिल हैं—का पंजीकरण रद्द, निलंबित या नवीनीकरण न होने की स्थिति में उसकी संपत्ति और धन को जब्त करने, प्रबंधित करने या निपटाने की शक्ति दी जा सकती है।
संगठन का कहना है कि यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन के अधिकारों का उल्लंघन है। इसके अलावा अनुच्छेद 29 और 30 के तहत अल्पसंख्यकों को दिए गए सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकारों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
प्रेस वक्तव्य में यह भी कहा गया कि चर्च और उससे जुड़े संस्थान दशकों से समुदाय के संसाधनों और दुनिया भर के ईसाइयों की मदद से बनाए गए हैं और इनका उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कार्यों के लिए किया जाता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सरकारी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में इन संस्थानों पर सरकारी नियंत्रण का प्रयास आम लोगों को ही नुकसान पहुंचाएगा।
AICU ने यह भी आरोप लगाया कि 2014 के बाद से FCRA कानून के तहत कार्रवाई का असर कई ईसाई संगठनों पर असमान रूप से पड़ा है। संगठन के मुताबिक, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा से जुड़े हजारों संगठनों के लाइसेंस रद्द या निलंबित किए जाने से अनिश्चितता का माहौल बना है।
संगठन ने दावा किया कि 2025 में ईसाइयों के खिलाफ 700 से अधिक उत्पीड़न की घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि क्रिसमस के दौरान कम से कम 150 मामलों में प्रार्थना सभाओं में बाधा, तोड़फोड़ और हमले की घटनाएं सामने आईं।
ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन ने केंद्र सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें भी रखी हैं। इनमें FCRA संशोधन बिल 2026 को पूरी तरह वापस लेने, संसद में स्पष्ट आश्वासन देने, 2014 के बाद प्रभावित 6000 से अधिक ईसाई संगठनों की स्वतंत्र समीक्षा कराने, धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और घृणा भाषण पर कड़ी कार्रवाई करने और ईसाई नेतृत्व के साथ औपचारिक संवाद शुरू करने की मांग शामिल है।
AICU ने कहा कि ईसाई समुदाय ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में किसी भी तरह का प्रतिबंध या नियंत्रण केवल एक समुदाय ही नहीं बल्कि भारत की बहुलतावादी सामाजिक संरचना को भी प्रभावित करेगा।
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