बिहार विधानसभा चुनाव 2025: महागठबंधन की बुरी हार, एनडीए की फिर से सरकार

November 14, 2025 3:27 PM

Bihar Election Result 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आज घोषित हो रहे हैं, जहां सुबह 8 बजे से 243 सीटों पर वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है। बिहार विधानसभा चुनाव के तहत सभी 243 सीटों के अलावा जम्मू-कश्मीर, पंजाब समेत सात राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों की आठ विधानसभा सीटों के परिणाम आज जारी होंगे। उपचुनाव वाली सीटों पर 11 नवंबर को वोट डाले गए, जबकि बिहार में दो चरणों (6 और 11 नवंबर) के तहत मतदान हुआ। बिहार विधानसभा चुनाव और सात राज्यों की आठ सीटों पर हुए उपचुनाव के परिणाम आज घोषित किए जाएंगे।

9:55 बजे तक चुनाव आयोग की रिपोर्ट

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी रुझान दिख रहे हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, सुबह 9:55 बजे तक भाजपा 51, जेडीयू 48, राजद 25, लोजपा 13, कांग्रेस 7, हम 3 और वीआईपी, AIMIM, माकपा, माले एक सीट पर आगे चल रही है। अभी तक कुल 154 सीटों पर रुझान सामने आए हैं।

बिहार चुनाव: जदयू की अप्रत्याशित बढ़त, भाजपा को पीछे छोड़ा

सुबह 10 बजे तक के रुझानों में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर आई है। जदयू 61 सीटों पर मजबूती से आगे चल रही है, जबकि भाजपा 56 सीटों पर ठहर गई है। आरजेडी 33 सीटों पर अपनी पकड़ बनाए हुए है और मतगणना का दौर जारी है।

मोकामा में बाहुबली अनंत सिंह और वीणा देवी के बीच जोरदार टक्कर

बिहार चुनाव के नतीजों में सबसे रोमांचक मुकाबला मोकामा विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिल रहा है, जहां बाहुबली अनंत सिंह का सीधा सामना पूर्व विधायक सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी से हो रहा है। दोनों पक्षों के पोलिंग एजेंट काउंटिंग सेंटर पहुंच चुके हैं और मतगणना की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। जीत की उम्मीद में दोनों के घरों पर भोज की भव्य तैयारी शुरू हो चुकी है, जो इस मुकाबले की तीव्रता को दर्शा रही है।इसी क्रम में अन्य बाहुबली प्रभावित सीटों पर भी पारिवारिक दिग्गज मैदान में हैं, दानापुर से रीतलाल यादव, ब्रह्मपुर से हुलास पांडे, रघुनाथपुर से शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब, वारिसलीगंज से अशोक महतो की पत्नी अनीता तथा लालगंज से मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी अपनी राजनीतिक विरासत को मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

शुरुआती रुझानों में भाजपा का दबदबा, मतगणना तेज

चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट से मिले शुरुआती रुझानों के मुताबिक, बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा पांच सीटों पर मजबूती से आगे चल रही है। ये रुझान मतगणना के प्रारंभिक चरण में ही स्पष्ट हो चुके हैं, जो राज्य की राजनीतिक गतिविधियों में एनडीए गठबंधन की बढ़त का संकेत दे रहे हैं।

इसी तरह, महागठबंधन के घटकों में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) दो सीटों पर और कांग्रेस एक सीट पर बढ़त बनाए हुए दिखाई दे रही है। हालांकि, ये आंकड़े बदल सकते हैं क्योंकि 243 सीटों पर वोटों की गिनती अभी भी जोर-शोर से जारी है, और पूर्ण नतीजे आने में कुछ समय लग सकता है।

जोकीहाट: भाइयों के बीच पारिवारिक जंग, विरासत पर दांव

बिहार के जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र में इस बार चुनावी रिंग में भाइयों के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। आरजेडी ने बाहुबली तस्लीमुद्दीन के बेटे शाहनवाज आलम को टिकट थमाया है जो अपने बड़े भाई और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार सरफराज आलम से भिड़ रहे हैं। 2020 के चुनाव में सरफराज को ही आरजेडी का समर्थन मिला था, लेकिन शाहनवाज ने एआईएमआईएम के बैनर तले मैदान संभाला और शानदार जीत हासिल की।

इस बार घर वापसी करते हुए शाहनवाज आरजेडी के पाले में आ चुके हैं, जो उनकी राजनीतिक यात्रा को नया मोड़ दे रही है। पूर्व मंत्री रह चुके शाहनवाज का वोटबैंक आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन के दम पर मजबूत माना जा रहा है।मुकाबले को और रोचक बनाने वाले अन्य दावेदारों में एआईएमआईएम के मुर्शीद आलम शामिल हैं, जो पांच बार मुखिया रह चुके हैं और सरफराज के पारंपरिक वोटबैंक में सेंधमारी कर सकते हैं। वहीं, जेडीयू के उम्मीदवार मंजर आलम भी जन सुराज को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में हैं। यह त्रिकोणीय संघर्ष न केवल पारिवारिक वर्चस्व की परीक्षा लेगा, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति की दिशा भी तय कर सकता है।

बाढ़ विधानसभा, ‘मिनी चित्तौड़गढ़’ में राजपूत गढ़ की रक्षा पर दांव

पटना जिले की बाढ़ विधानसभा सीट को ‘मिनी चित्तौड़गढ़’ के नाम से जाना जाता है, जहां 1980 को छोड़कर ज्यादातर चुनाव राजपूत उम्मीदवारों के नाम रहते हैं। इस बार एनडीए ने बीजेपी के बैनर तले चार बार की लगातार जीत दर्ज कराने वाले ज्ञानेंद्र सिंह ‘ज्ञानू’ को किनारे लगाते हुए डॉ. सियाराम सिंह को मैदान में उतारा है। वहीं, महागठबंधन की ओर से आरजेडी ने बाहुबली कर्णवीर सिंह उर्फ लल्लू मुखिया को टिकट थमाया है, जो क्षेत्रीय राजनीति में विवादास्पद छवि के बावजूद यादव वोटबैंक पर भरोसा जमा रहे हैं।

यह बदलाव जातिगत समीकरणों को नया रंग भरने की कोशिश कर रहा है।
कर्णवीर सिंह की स्थानीय स्तर पर इमेज बदनाम मानी जाती है, खासकर हाल ही में जेडीयू समर्थक धानुक जाति के वरुण कुमार द्वारा उन पर दर्ज कराए गए मारपीट के मामले के बाद। दूसरी ओर, लगभग 80 प्रतिशत राजपूत वोट बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में ही पड़ते रहे हैं, जबकि भूमिहार, ब्राह्मण, बनिया समुदायों के साथ जेडीयू का ईबीसी वोटबैंक भी एनडीए की झोली में जाने की उम्मीद है। ऐसे में कर्णवीर की जीत का दारोमदार मुख्य रूप से यादव मतदाताओं पर टिका हुआ है, जो इस सीट की जातीय जंग को और तीखा बना सकता है।

वारिसलीगंज: पत्नियों के बीच जातीय जंग

बिहार के वारिसलीगंज विधानसभा क्षेत्र में इस बार दो दिग्गज महिलाएं आमने-सामने हैं। महागठबंधन की ओर से अशोक महतो की पत्नी अनीता देवी मैदान संभाल रही हैं, जहां 2005 और 2010 में अशोक के भतीजे प्रदीप महतो ने लगातार जीत हासिल की थी। वहीं, एनडीए की बीजेपी ने 90 के दशक के अखिलेश सिंह की पत्नी अरुणा देवी को टिकट दिया है, जो इस सीट से चार बार विधायक रह चुकी हैं। यह मुकाबला न केवल पारिवारिक दबदबे की परीक्षा ले रहा है, बल्कि क्षेत्र की राजनीति को नया आयाम दे सकता है।

अरुणा देवी को मौजूदा समय में एंटी-इनकंबेंसी का सामना करना पड़ रहा है, जो उनकी जीत के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन सकती है। कांग्रेस ने शुरू में अपना उम्मीदवार उतारकर अनीता देवी के वोटबैंक को चोट पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन अंतिम क्षण में नाम वापस ले लिया, जिससे अनीता को राहत मिली। इस सीट पर हमेशा से अगड़ा बनाम पिछड़ा जातियों की तीखी लड़ाई देखने को मिलती रही है, और इस बार भी वोटों का ध्रुवीकरण इसी आधार पर तय होगा।

बिहार चुनाव: सुबह 9 बजे तक एनडीए की मजबूत बढ़त

चुनाव आयोग के सुबह 9 बजे तक के आंकड़ों से साफ है कि एनडीए ने 111 सीटों पर बढ़त हासिल कर ली है।
महागठबंधन भी पीछे नहीं टूटा और 75 सीटों पर मजबूत पकड़ बना रखी है। जन सुराज पार्टी ने तीन सीटों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है, जबकि मतगणना जारी है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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