Ban on Indian mangoes: भारत के लोकप्रिय आमों को दो बड़े बाजारों में झटका लगा है। जापान के बाद अब नेपाल ने भी भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। दोनों देशों ने फसल सुरक्षा मानकों (फाइटोसैनिटरी स्टैंडर्ड) और कीटनाशक संबंधी चिंताओं को वजह बताया है। जापान ने कुछ सप्ताह पहले भारत के चार प्रमुख आमों की किस्मों अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली पर पहली बार 20 वर्षों में प्रतिबंध लगाया। जापानी प्लांट इंस्पेक्टरों ने पाया कि भारत के निर्यात सुविधा केंद्र समझौते के अनुसार मानकों का पालन नहीं कर रहे थे। जापान ने पहले भी फ्रूट फ्लाई की समस्या के कारण भारतीय आमों पर रोक लगाई थी, जिसे वर्ष 2006 में भारत द्वारा बेहतर उपचार प्रक्रिया अपनाने के बाद हटा लिया गया था।
नेपाल ने अप्रैल महीने के आसपास से भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगा दिया। मुख्य कारण अधिक मात्रा में कीटनाशक और निर्यातकों द्वारा क्वारंटाइन प्रोटोकॉल का पालन न करना बताया गया। नेपाल सरकार ने नये क्वारंटाइन नियम बनाए हैं जिनके तहत भारतीय आमों को हॉट वॉटर इमर्शन ट्रीटमेंट (गर्म पानी में डुबोकर उपचार) से गुजरना जरूरी है। यह प्रक्रिया कीटों और फंगस को मारने के लिए की जाती है लेकिन भारतीय निर्यातकों के अनुसार, 22,000 पाउंड (लगभग 10 टन) के एक शिपमेंट के लिए यह उपचार करने में अतिरिक्त 40 घंटे लग जाते हैं, जिससे लागत बहुत बढ़ जाती है। कई निर्यातक इसे मुनाफे के लिए नुकसानदायक बता रहे हैं।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है। अल्फांसो और केसर जैसी किस्में विदेशों में बहुत लोकप्रिय हैं। इन प्रतिबंधों से महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख आम उत्पादक राज्यों के किसान और निर्यातक प्रभावित होंगे। कृषि मंत्रालय और निर्यात संवर्धन एजेंसियां दोनों देशों के साथ बातचीत कर मानकों को पूरा करने और समस्या का समाधान निकालने का प्रयास कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि निर्यात सुविधाओं को बेहतर बनाने और सख्त गुणवत्ता नियंत्रण की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसे प्रतिबंध न लगें।









