X के कम्युनिटी नोट्स पर सरकारी डंडे से मचे घमासान के बीच आज फिर लगा पीएम मोदी की पोस्ट पर नोट

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नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली

सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में प्रस्तावित संशोधनों के साथ, एक्स पर यूजर-जनरेटेड फैक्ट-चेकिंग टूल कम्युनिटी नोट्स को आधिकारिक रूप से सूचना और प्रसारण मंत्रालय के नियामक दायरे में लाने की कवायद चल रही है।

इस कवायद के बीच केंद्र सरकार उन सामग्री को हटाने के लिए कह सकेगी जो आधिकारिक दावों को गलत साबित करती है। यह जानकारी हिंदुस्तान टाइम्स ने एक सरकारी अधिकारी के हवाले से दी है, जो इस मुद्दे से वाकिफ हैं। ग़ज़ब यह है कि जब सोशल इस मीडिया पर इसको लेकर बहस छिड़ी है ट्विटर ने पीएम मोदी की ही एक पोस्ट पर कम्युनिटी नोट लगा दिया।

पीएम की पोस्ट पर आज ही लग गया कम्युनिटी नोट

दरअसल शनिवार को पीएम मोदी ने ज्योतिबा फुले को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी उन्होंने कहा कि महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती पर, मैं एक दूरदर्शी सामाजिक सुधारक को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ, जिन्होंने अपने जीवन को समानता, न्याय और शिक्षा के आदर्शों को समर्पित कर दिया। वे महिलाओं और हाशिए पर पड़े लोगों के अधिकारों की लड़ाई में भी अग्रणी रहे।

उनकी कोशिशों से शिक्षा सशक्तिकरण का एक शक्तिशाली माध्यम बन गई। इस वर्ष हम उनकी 200वीं जयंती समारोह की शुरुआत मना रहे हैं। आशा है कि उनकी विचारधारा समाज की प्रगति की दिशा में हर किसी का मार्गदर्शन करती रहेगी। इसके जवाब में ट्विटर ने एक कम्युनिटी नोट लगाया कि फूले अंग्रेजों के समर्थक और हिन्दू विरोधी थी और वे कोई समाज सुधारक नहीं थे। हालांकि इस नोट को बाद में हटा दिया गया।

ऐसी स्थिति से बचने के लिए जाए जा रहे प्रस्ताव

दरअसल इस तरह की अपरिहार्य स्थिति से बचने के लिए सरकार यह प्रस्ताव ला रही है।प्रस्तावित संशोधनों के विस्तारित ढांचे के तहत, कोई भी कम्युनिटी नोट अगर समाचार, राजनीति या सार्वजनिक नीति से संबंधित लगने लगे, तो उसे जांच के दायरे में लाया जा सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के एक अधिकारी ने अखबार को यह जानकारी दी।

कई मंत्रियों के बयानों पर लगे कम्युनिटी नोट्स

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस साल की शुरुआत में, भाजपा नेताओं और मंत्रियों के एक्स पर कई पोस्ट्स पर कम्युनिटी नोट्स लगे थे, जिन्हें सरकार ने प्लेटफॉर्म के सामने उठाया था। कंपनी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, जिन पोस्ट्स पर नोट्स लगे उनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव शामिल थे।
अगर सरकार प्रस्तावित संशोधनों के विस्तारित फ्रेमवर्क के तहत किसी नोट को गैर-कानूनी मानती है, तो प्रक्रिया सामान्य रूट की तरह होग प्लेटफॉर्म को टेकडाउन या ब्लॉकिंग डायरेक्टिव भेजा जाएगा, जिसमें तय समय के अंदर सामग्री हटाने या एक्सेस ब्लॉक करने की जरूरत होगी।

15 दिनों में मांगी गई टिप्पणियां

30 मार्च 2026 को, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 2021 के आईटी नियमों में प्रस्तावित संशोधनों को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किया, जिसमें केवल 14 अप्रैल तक टिप्पणियां मांगी गई हैं यानी मात्र 15 दिनों का समय। यह बदलाव अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मध्यस्थ प्लेटफॉर्म्स के शासन पर दूरगामी प्रभाव डाल सकते हैं।

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