Epstein Files के ज़रिए मीडिया में फैली AI जनरेटेड फर्जी तस्वीरें, फैक्ट चेक में आयी सच्चाई, दलाई लामा का नाम आने पर कहा ‘वो कभी नहीं मिले’

अमेरिका के न्याय विभाग ने 30 जनवरी 2026 को Epstein Files ट्रांसपेरेंसी एक्ट के तहत करीब 35 लाख पेज के दस्तावेज जारी किए। ये दस्तावेज दोषी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े हैं, जिनमें कई बड़े नामों का जिक्र है। लेकिन इन फाइल्स से कुछ नामों को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाहें और फर्जी तस्वीरें तेजी से फैलीं। भारतीय-अमेरिकी फिल्म निर्देशक मीरा नायर और तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के नाम भी इनमें शामिल हैं। फैक्ट चेकिंग संगठन ऑल्ट न्यूज और अन्य जांचों से पता चला कि कई दावे पूरी तरह मनगढ़ंत हैं।

एपस्टीन फाइल्स क्या हैं और क्यों चर्चा में?

जेफरी एपस्टीन एक अमीर फाइनेंशियर थे जिन्हें यौन तस्करी और अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था। उनकी मौत 2019 में जेल में हुई। अमेरिकी न्याय विभाग ने हाल ही में लाखों पेज जारी किए जिनमें ईमेल, दस्तावेज और किताबों की इंडेक्स शामिल हैं। इनमें कई सेलिब्रिटी, नेता और व्यापारियों के नाम आए हैं लेकिन तर्क दिया जा रहा है कि नाम का जिक्र होना किसी गलत काम का सबूत नहीं माना जाता। कई मीडिया रिपोर्ट्स में अलग-अलग दावे सामने आ रहें हैं।

मीरा नायर और जोहरान ममदानी का मामला, फर्जी तस्वीरों का खेल

फाइल्स में मीरा नायर का नाम एक ईमेल में आया, जो न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी की मां हैं। ईमेल 2009 का है, जिसमें मीरा नायर को एक पार्टी में बिल क्लिंटन और जेफ बेजोस के साथ उल्लेखित किया गया है। लेकिन इसके बाद सोशल मीडिया पर फर्जी तस्वीरें वायरल हो गईं। इनमें मीरा नायर को एक छोटे बच्चे (कथित तौर पर जोहरान) के साथ एपस्टीन, क्लिंटन, बिल गेट्स और अन्यों के साथ दिखाया गया।

दावा किया गया कि जोहरान एपस्टीन के ‘biological son हैं या उनका पालन-पोषण एपस्टीन ने किया। अमेरिकी अभिनेता माइकल रैपापोर्ट ने ऐसी एक तस्वीर शेयर की जिसे 86,700 बार देखा गया।


एक्स यूजर एलेक्स जोन्स ने कोलाज पोस्ट किया, जिसे 21 लाख व्यूज मिले। भारत में कुछ प्रो-बीजेपी अकाउंट्स जैसे ‘द जयपुर डायलॉग्स’ और ‘वॉइसेस ऑफ हिंदूज’ ने भी ये तस्वीरें शेयर कीं जिन्हें लाखों व्यूज मिले।

ऑल्ट न्यूज की जांच से क्या निकला?

ऑल्ट न्यूज ने इन तस्वीरों की जांच की और पाया कि सभी पर ‘DFF’ नाम का वॉटरमार्क है। रिवर्स इमेज सर्च से पता चला कि ये एक पैरोडी एक्स अकाउंट (@DFF) से आई हैं, जो AI से मीम्स और वीडियो बनाता है। अकाउंट ने खुद माना कि तस्वीरें जानबूझकर फेक बनाई गईं। गूगल के AI टूल जेमिनी ने भी कन्फर्म किया कि ये इमेजेस सिंथेटिक हैं। अन्य फैक्ट चेकर्स जैसे AFP, Snopes और Lead Stories ने भी इन्हें फेक बताया।

जोहरान ममदानी ने इन इमेजेस को डिस्टर्बिंग बताया और कहा कि AI की वजह से ऐसी फेक चीजें फैल रही हैं, जो असली परेशानी पैदा कर सकती हैं।

दलाई लामा का नाम 169 बार लेकिन कार्यालय ने बताया बेबुनियाद

कई मीडिया रिपोर्ट्स में बात सामने आयी की फाइल्स में दलाई लामा का नाम 169 बार आया है। ज्यादातर ईमेल्स में, जैसे 2012 का एक ईमेल जहां एपस्टीन किसी इवेंट में जा रहा है और दलाई लामा का भी जिक्र है। कुछ मेंशन्स MIT के पूर्व डायरेक्टर जोइची इटो से जुड़े हैं, जिन्होंने एपस्टीन से फंडिंग ली थी। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि इतने उल्लेख से गहरा कनेक्शन साबित होता है।

लेकिन 8 फरवरी 2026 को दलाई लामा के कार्यालय की तरफ से जारी किये गए एक बयान में साफ कहा गया कि दलाई लामा ने कभी एपस्टीन से मुलाकात नहीं की और न ही किसी को अनुमति दी। ये दावे ‘पूरी तरह गलत और भ्रामक’ हैं। फैक्ट चेकर्स ने पुष्टि की कि नाम का उल्लेख कोई अपराध या गलत काम का सबूत नहीं है। कोई मिसकंडक्ट का एविडेंस नहीं मिला।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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