उत्तर प्रदेश में स्थित मोक्ष की नगरी बनारस में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के दौरान व्यापक स्तर पर आवासों, मंदिरों और ऐतिहासिक ढांचों के विध्वंस के कारण स्थानीय लोगों, पंडा समाज और विरासत संरक्षकों द्वारा कड़ा विरोध किया गया। विरोध का मुख्य कारण सांस्कृतिक पहचान के खोने का डर, व्यापार और आजीविका की हानि और बुलडोजर संस्कृति थी। अब सरकार के द्वारा बिहार में स्थित मोक्ष की नगरी गया में यहीं सब दोहराया जा रहा है।

बिहार की धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी गयाजी में विष्णुपद कॉरिडोर का निर्माण शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गया है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर स्थानीय गयापाल पंडा समाज और करसिल्ली क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है।
11 मई को विष्णुपद स्थित विश्राम गृह में ‘श्री विष्णुपद क्षेत्रीय जन जागरण मंच’ और श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर कॉरिडोर निर्माण का विरोध किया। उन्होंने इसे गयाजी की धार्मिक, पौराणिक और सांस्कृतिक अस्मिता पर हमला बताया।
इस दौरान विष्णुपद प्रबंध कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभू लाल विट्ठल ने कहा कि,”शुरुआत में मैंने कॉरिडोर निर्माण का समर्थन किया था। मुझे लगा कि इससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी। हालांकि अब जो वर्तमान नक्शे से स्पष्ट दिख रहा है कि कि इससे गयापाल पंडों की सांस्कृतिक विरासत और परंपरा को गंभीर क्षति पहुंचेगी। समाज के व्यापक विरोध को देखते हुए जिला प्रशासन को लिखित रूप से विरोध पत्र भी सौंपा गया है।”
सभा के दौरान ‘कॉरिडोर वापस लो’ के नारे गूंजे। बैठक में मौजूद लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं और प्राचीन ढांचों के साथ छेड़छाड़ की, तो चरणबद्ध तरीके से बड़ा आंदोलन चलाया जाएगा।
स्थानीय लोगों के मुताबिक वर्तमान नक्शा के हिसाब से कॉरिडोर बना तो मंदिर के आसपास के 694 घर टूटेंगे। जिसमें कुछ ऐतिहासिक महत्व की संरचनाएं भी हैं। अगर ऐसा हुआ तो गया की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान ही खत्म हो जाएगी। यह केवल भवनों को हटाने का मामला नहीं, बल्कि गयाजी की सनातन संस्कृति को मिटाने का प्रयास है।
धरोहर मिटाकर कैसा विकास?
‘कॉरिडोर विकास के नाम पर अगर आम लोगों के घर, दुकान, रोजगार और वर्षों पुरानी बस्तियां उजाड़ी जाएगी, तो यह न्याय नहीं होगा। हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास नहीं चाहिए जो गरीबों को बेघर कर दे और स्थानीय लोगों की पहचान मिटा दे।’ 33 वर्षीय अभिषेक कुमार बताते हैं।

‘विष्णुपद कॉरिडोर निर्माण के क्रम में अगर मकानों को तोड़ा जाता है तो पहले लोगों को मकान मुहैया कराए बिहार सरकार। जानबूझ कर हम लोगों को घरों से बेघर किया जा रहा है। जनता की राय लेकर ही कोई निर्णय लिया जाए और गया की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बचाया जाए।’ कुंदन सिन्हा बताते हैं।
‘विष्णुपद मंदिर के सारे पंडा लोगों ने मंदिर क्षेत्र का अतिक्रमण कर रखा है। धार्मिक स्थल को और भव्य और भक्त की बढ़ती भीड़ को सुविधा देने के लिए कॉरिडोर बनाना जरूरी है।’ सृजन अभिषेक बताते है।
‘प्रशासन द्वारा करसिल्ली मोहल्ले में घरों को चिन्हित किया गया है। लेकिन स्पष्ट नहीं किया जा रहा है कि कितना मकान टूटेगा। मेरा मानना हैं कि कॉरिडोर का निर्माण सिर्फ विष्णुपद मंदिर के जमीन पर ही होना चाहिए। निजी जमीन पर निर्माण बिल्कुल नहीं होना चाहिए।’ सुरेंद्र पांडे बताते है।
कॉरिडोर को लेकर स्थानीय नागरिक अपनी बात कह रहे हैं। अधिकांश लोग विरोध में है वहीं कुछ लोग समर्थन में भी हैं।
बनारस और गया जैसे प्राचीन शहर की पहचान उनकी धरोहर
सामाजिक कार्यकर्ता सुनील झा यूनिसेफ संस्था से जुड़े रहे है। वह बताते हैं कि,”गया जी में निर्माण हो रहा कॉरिडोर की मांग वहां के स्थानीय लोग नहीं कर रहे हैं। बनारस और गया जैसे प्राचीन शहर की पहचान उनकी धरोहर है। इसपर बुलडोजर और जेसीबी चलाना कहीं से उचित प्रतीत नहीं होता। फिलहाल तो पंडा समाज दान में मिले पीतल और कांसे के लोटे लेकर लड़ने को तैयार बैठा है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में इतिहास की पढ़ाई कर रहे मयंक बताते हैं कि,”पांडा समाज को साधुवाद। गयाजी अब बिहार का इकलौता शहर है जहां हेरिटेज इमारत अब भी सैंकड़ों की संख्या में मौजूद हैं। इस तरह के कॉरिडोर बना कर सिर्फ विरासत को खत्म किया जा रहा है।”
गया के विष्णुपद कॉरिडोर की घोषणा 2024-25 के आम बजट में हुई थी। 1 मई 2026 को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर गया पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी विष्णुपद और बोधगया में कॉरिडोर निर्माण की अपने स्तर से घोषणा की, जिसके बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया।
हालांकि पंडा समुदाय के तीखे विरोध के बाद गया जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी है कि विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर निर्माण को लेकर जिला प्रशासन को कई ज्ञापन प्राप्त हुए हैं। जिला प्रशासन स्पष्ट करता है कि इन ज्ञापनों और आवेदनों पर विचार करने के बाद ही नक्शे को अंतिम रूप दिया जाएगा। वर्तमान समय में कोई सर्वेक्षण या चिन्हीकरण नहीं किया जाएगा। लोगों से प्राप्त सुझावों को समेकित करने के बाद ही आगे कोई कार्रवाई की जाएगी। लोगों को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। अपनी बात नगर निगम और अनुमंडल पदाधिकारी सदर के समक्ष रख सकते हैं। अभी कोई नक्शा फाइनल नहीं है।
बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर परियोजना विश्व प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर व उसके आसपास के क्षेत्र को विकसित करने पर केंद्रित है। वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर मंदिर परिसर का विस्तार व सौंदर्यीकरण इसका मुख्य लक्ष्य है। योजना में मंदिर तक पहुंच मार्गों का चौड़ीकरण, श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं, तीर्थयात्री शेड और फल्गु नदी तट का विकास शामिल है।
गया में विष्णुपद मंदिर व सीता कुंड के बीच फल्गु नदी में भगवान विष्णु की 108 फीट ऊंची मिश्र धातु प्रतिमा स्थापित होगी। प्रतिमा तक 20 फीट चौड़ा पेडेस्ट्रियन पथ बनेगा, जो तीर्थयात्रियों के लिए सुगम आवागमन सुनिश्चित करेगा। सरकार का उद्देश्य गया को प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाना है, ताकि पितृपक्ष मेले व अन्य दिनों में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिले।











