मणिपुर में एक लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे, डिप्टी सीएम को हटाने की मांग, सरकार को इस्तीफे की चेतावनी

इंफाल। मणिपुर (Manipur) में जारी हिंसा और केंद्र सरकार की भूमिका को लेकर रविवार को बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ। राजधानी इंफाल में एक लाख से ज्यादा लोगों ने रैली निकालकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शन में पहाड़ी और मैदानी दोनों इलाकों के लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर मणिपुर में परोक्ष युद्ध को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। साथ ही डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन को पद से हटाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार उन्हें पद से नहीं हटाती है तो मौजूदा सरकार को इस्तीफा देना चाहिए।

पहाड़ और घाटी के लोग एक साथ सड़कों पर उतरे

‘मणिपुर में भारत सरकार के परोक्ष युद्ध के खिलाफ जनविद्रोह’ के बैनर तले निकाली गई इस रैली का आयोजन COCOMI, जॉइंट ट्राइब्स काउंसिल और कई नगा संगठनों ने मिलकर किया था। यूनाइटेड नगा काउंसिल ने भी इसका समर्थन किया।

रैली सुबह 11 बजे क्वाकैथेल के टिडिम ग्राउंड से शुरू हुई। हजारों लोग शहर की प्रमुख सड़कों से होते हुए थांगमेइबंद के THAU ग्राउंड पहुंचे। प्रदर्शनकारी ‘पहाड़ और मैदान के लोग एक हैं’ और ‘मणिपुर जिंदाबाद’ जैसे नारे लगा रहे थे। उनके हाथों में हिंसा रोकने, विस्थापित परिवारों की घर वापसी और सशस्त्र संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली तख्तियां थीं। सुरक्षा को देखते हुए पूरे रास्ते पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात रहे।

डिप्टी सीएम को हटाने की मांग, छह प्रस्ताव पारित

रैली के बाद THAU ग्राउंड में जनसभा हुई, जिसमें छह प्रस्ताव पारित किए गए। सबसे प्रमुख मांग डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन को मंत्रिमंडल से हटाने की रही। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार ऐसा करने में असमर्थ है तो उसे सत्ता छोड़ देनी चाहिए।

सभा में कुकी सशस्त्र संगठनों के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते की अवधि नहीं बढ़ाने और इसके तहत बनाए गए शिविरों को बंद करने की मांग भी उठी। संगठनों का कहना था कि राज्य में सक्रिय सभी हथियारबंद समूहों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।

विस्थापित परिवारों की घर वापसी और NRC की मांग

प्रदर्शनकारियों ने मई 2023 से हिंसा के कारण घर छोड़ने को मजबूर हुए परिवारों की सुरक्षित वापसी और पुनर्वास की मांग की। उन्होंने कहा कि राहत शिविरों में रह रहे लोगों को सुरक्षा, घर और रोजगार की व्यवस्था के साथ वापस बसाया जाए।

इसके अलावा असम राइफल्स की जगह किसी दूसरे निष्पक्ष सुरक्षा बल को अंतरराष्ट्रीय सीमा की जिम्मेदारी देने और 1951 को आधार वर्ष मानकर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) अपडेट करने की मांग की गई।

पहाड़ी जिलों में भी प्रदर्शन

इंफाल के अलावा सेनापति, उखरुल, चंदेल, तामेंगलोंग और नोनी जिलों में भी रैलियां निकाली गईं। आयोजकों ने सभी छह प्रस्ताव केंद्र और राज्य सरकार को भेजने का फैसला किया है। संगठनों ने मांगों पर जल्द कार्रवाई करने को कहा है।

हालांकि, केंद्र सरकार पर परोक्ष युद्ध और सशस्त्र समूहों को संरक्षण देने के आरोप प्रदर्शनकारी संगठनों के हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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