बस्तर में दो दशक बाद फिर खुलेंगे आश्रम स्कूल, बीजापुर में ग्रामीण खुद तैयार कर रहे निर्माण के लिए जमीन

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर (Bastar) में नक्सली गतिविधियां कम होने के बाद अब उन गांवों तक भी सरकारी सुविधाएं पहुंचने लगी हैं, जहां लंबे समय से प्रशासन की पहुंच नहीं थी। दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों के अंदरूनी इलाकों में नए आश्रम भवनों के निर्माण को मंजूरी मिली है। इनमें बीजापुर जिले की तमोड़ी पंचायत भी शामिल है, जहां ग्रामीणों ने आश्रम भवन बनने से पहले ही अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग मिलकर श्रमदान कर रहे हैं। कोई झाड़ियां काट रहा है तो कोई जमीन साफ करने में जुटा है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि आश्रम बनने से उनके बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।

सलवा जुडूम के दौर में बंद हो गए थे कई आश्रम

करीब 20 से 22 साल पहले दक्षिण बस्तर के कई अंदरूनी गांवों में स्कूल और आश्रम शालाएं संचालित होती थीं। इनमें से अधिकांश झोपड़ियों और अस्थायी भवनों में चलती थीं। सलवा जुडूम के दौरान नक्सलियों ने कई आश्रम शालाओं को ध्वस्त कर दिया था। वहीं, सुरक्षा कारणों और कठिन परिस्थितियों के चलते सरकार ने भी कई शिक्षण संस्थानों को जिला मुख्यालयों के आसपास स्थानांतरित कर दिया था।

इसके बाद बड़ी संख्या में गांवों के बच्चों को स्थानीय स्तर पर पढ़ाई की सुविधा नहीं मिल सकी। कई इलाकों में माओवादियों ने अपनी जनताना सरकार के तहत स्कूल भी संचालित किए, जहां बच्चों को उनकी विचारधारा के अनुरूप शिक्षा दी जाती थी। अब सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के साथ सरकार इन क्षेत्रों में दोबारा स्कूल और आश्रम खोलने की दिशा में काम कर रही है।

रापा-टंगिया लेकर श्रमदान कर रहे ग्रामीण

बीजापुर की तमोड़ी पंचायत में आश्रम भवन को मिली स्वीकृति से ग्रामीणों में खासा उत्साह है। भवन निर्माण के लिए गांव की नजूल जमीन पर मौजूद पेड़-पौधों और झाड़ियों की सफाई की जा रही है। ग्रामीण अपने घरों से रापा, टंगिया और दूसरे औजार लेकर पहुंच रहे हैं। इस काम में महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की भी भागीदारी है।

ग्रामीणों की यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि लंबे समय तक इस इलाके में सरकारी शिक्षण संस्थानों की सुविधा नहीं थी। अब गांव में ही आश्रम खुलने से बच्चों को रहने और पढ़ने की सुविधा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, भवन निर्माण कब शुरू होगा और इसके लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई है, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

सड़क नहीं, तो निर्माण सामग्री कैसे पहुंचेगी?

आश्रम भवनों की स्वीकृति के साथ इनका निर्माण पूरा करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी। दक्षिण बस्तर के कई अंदरूनी गांव आज भी सड़क संपर्क से दूर हैं। ऐसे में सीमेंट, सरिया, ईंट और दूसरी निर्माण सामग्री पहुंचाना आसान नहीं होगा। बरसात के दिनों में इन इलाकों तक पहुंचना और भी मुश्किल हो जाता है।

फिलहाल तमोड़ी के ग्रामीण अपनी ओर से जमीन तैयार करने में जुटे हैं। अब आगे की जिम्मेदारी प्रशासन की है। भवन निर्माण के लिए सामग्री पहुंचाने, काम शुरू कराने और उसे समय पर पूरा करने की व्यवस्था करनी होगी। लंबे इंतजार के बाद गांव में आश्रम खुलने की उम्मीद जगी है। ग्रामीणों के इस प्रयास को तभी सफलता मिलेगी, जब स्वीकृत भवन बनकर तैयार होगा और बच्चों की पढ़ाई शुरू हो सकेगी।

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