छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के असर से हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई खेतों में कटाई के लिए तैयार हो रही धान की फसल पानी में गिर गई है। दुर्ग जिले के अमलेश्वर में भी किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है। किसानों का कहना है कि एक एकड़ धान की खेती में 35 से 40 हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं। ऐसे में अगर सरकार नुकसान के बदले दो से चार हजार रुपये का मुआवजा देती है, तो उससे क्या होगा? द लेंस ने अमलेश्वर के एक किसान से बात कर उनकी परेशानी और सरकार से उनकी मांगों को समझने की कोशिश की।
कटाई में 25 दिन बाकी थे, बारिश ने बिगाड़ दी पूरी मेहनत
दुर्ग जिले के अमलेश्वर के वार्ड क्रमांक 14 स्थित मगरघटा इलाके में रहने वाले किसान मनोहर साहू के खेत में धान की फसल पानी में गिरी हुई है। उनका कहना है कि फसल करीब 120 से 130 दिन की हो चुकी थी और लगभग 25 दिन बाद कटाई होनी थी। लेकिन इसी बीच हुई तेज बारिश ने उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
मनोहर बताते हैं कि धान की खेती में बीज, खाद, दवा, रोपाई और दूसरी जरूरतों पर काफी पैसा खर्च होता है। एक एकड़ में करीब 35 से 40 हजार रुपये लग जाते हैं। इसमें परिवार के लोगों की मेहनत का हिसाब भी शामिल नहीं है। अब फसल पानी में गिरने से उसकी गुणवत्ता खराब होने और पैदावार घटने का डर है।
कर्ज लेकर खेती की, अब नुकसान की भरपाई कैसे होगी?
मनोहर साहू ने बताया कि खेती के लिए कई बार किसानों को साहूकारों या दूसरी जगहों से उधार लेना पड़ता है। फसल तैयार होने के बाद धान बेचकर यही कर्ज चुकाया जाता है। लेकिन जब कटाई से पहले ही फसल खराब होने लगे, तो किसान के सामने कर्ज लौटाने की परेशानी खड़ी हो जाती है।
उनका कहना है कि बारिश के बाद खेतों में पानी जमा होने से धान में फंगस और माहू जैसे कीटों का खतरा भी बढ़ सकता है। अगर समय रहते फसल नहीं संभली, तो नुकसान और बढ़ सकता है।
मनोहर ने बताया कि सोसाइटी के जरिए उनकी फसल का बीमा हुआ है। हालांकि, उन्हें यह नहीं पता कि नुकसान का पैसा कब और कितना मिलेगा। उनका कहना है कि सरकार को किसानों की हालत देखते हुए जल्द उचित मुआवजा देना चाहिए।
किसान ने पूछा- 40 हजार का खर्च, 2 से 4 हजार के मुआवजे से क्या होगा?
मुआवजे को लेकर मनोहर साहू ने सरकार से सवाल किया है। उनका कहना है कि नुकसान होने के बाद पटवारी खेतों का सर्वे करेंगे और फिर मुआवजे की राशि तय होगी। लेकिन अगर प्रति एकड़ दो से चार हजार रुपये ही दिए गए, तो उससे किसान का खर्च भी नहीं निकल पाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार दूसरे वर्गों को आर्थिक राहत और भत्ते देती है, तो किसानों की मुश्किलों को भी उसी गंभीरता से देखना चाहिए। किसान महीनों खेत में मेहनत करता है, लेकिन एक बेमौसम बारिश उसकी पूरी कमाई छीन सकती है।
इस बीच पटवारियों की हड़ताल की जानकारी मिलने पर उन्होंने चिंता जताई कि अगर पटवारी काम नहीं करेंगे, तो फसल नुकसान का सर्वे कैसे होगा? उन्होंने सरकार से मांग की कि सर्वे के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों को मुआवजे के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े।
सरकार से उम्मीद, बच्चों का पेट पाल सकें किसान
छत्तीसगढ़ सरकार ने 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की घोषणा की है। लेकिन जिन किसानों की फसल बारिश से खराब हुई है, उनके सामने अब यह चिंता है कि वे खरीदी केंद्रों तक कितना धान पहुंचा पाएंगे।
मनोहर साहू ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से किसानों के लिए जल्द राहत की व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति पहले ही खराब है। सरकार को ऐसा कदम उठाना चाहिए, जिससे किसान अपने परिवार और बच्चों का पालन-पोषण कर सकें।
उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे किसान संगठनों के साथ मिलकर अपनी बात सरकार तक पहुंचाएंगे।
बातचीत के दौरान मनोहर साहू ने एक सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा, “अगर इंसान अन्न नहीं उगाएगा तो खाएगा क्या? ये सब ऑनलाइन तो नहीं आ जाएगा। कहीं से भी एआई से तो नहीं पैदा हो जाएगा चावल की खेती या कोई भी फसल।”
मनोहर का कहना है कि यह परेशानी केवल धान उगाने वाले किसानों की नहीं है। किसी भी फसल को तैयार करने में किसान को महीनों मेहनत करनी पड़ती है। इसलिए सरकार को सभी प्रभावित किसानों के नुकसान का सही आकलन कर मदद करनी चाहिए।
फिलहाल अमलेश्वर के इन खेतों में गिरी धान की फसल किसानों की चिंता बढ़ा रही है। कितनी फसल बच पाएगी और कितना नुकसान होगा, यह पानी उतरने और फसल की स्थिति साफ होने के बाद ही पता चलेगा। किसान अब सरकारी सर्वे, बीमा राशि और मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।









