गदलपुर – विश्वप्रसिद्ध बस्तर (Bastar) दशहरे की भीतर रैनी रस्म मातम में बदल गई। पारंपरिक रथ खींचने के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में एक ग्रामीण की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा ग्रामीण रथ की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गया और उसका पैर कट गया। घायल को महारानी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद ने इसकी पुष्टि की है।
इस दर्दनाक हादसे ने बस्तर दशहरे की व्यवस्थाओं और परंपराओं के निर्वहन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस ऐतिहासिक आयोजन को बस्तर की जनजातीय आस्था और गौरव का प्रतीक माना जाता है, उसी में एक ग्रामीण की जान चली गई और दूसरा जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा है। आखिर इस हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा?
‘रथ का पहिया टूटने से लेकर जेसीबी से खींचने तक सवाल ही सवाल’
बस्तर दशहरा समिति के पूर्व अध्यक्ष और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शासन-प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी है। बैज के मुताबिक, दशहरे के शुरुआती दिनों से ही रथ का पहिया टूटने और जेसीबी से रथ खींचे जाने जैसी घटनाएं सामने आईं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बस्तर की सदियों पुरानी परंपराओं को इसी तरह निभाया जाएगा?
बैज ने कहा कि परंपराओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और शासन-प्रशासन ने बस्तर दशहरे को मजाक बनाकर रख दिया है। उन्होंने मांग की कि मृतक के परिजनों और घायल ग्रामीण को तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए।
राष्ट्रपति के दौरे से पहले हादसा, व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
बस्तर दशहरे में राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे से ठीक पहले हुए इस हादसे ने आयोजन की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बैज ने कहा कि इतने बड़े और ऐतिहासिक आयोजन में ऐसी घटना बेहद गंभीर है। उनके अनुसार, रथ खींचने के दौरान मौत की ऐसी घटना पहले देखने को नहीं मिली थी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रथ खींचने की पारंपरिक रस्म के दौरान सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? क्या संभावित खतरे का आकलन किया गया था?
बस्तर दशहरा सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि यहां के आदिवासी समाज की आस्था, पहचान और परंपरा है। ऐसे आयोजन में एक ग्रामीण की मौत और दूसरे का गंभीर रूप से घायल होना महज हादसा बताकर टाला नहीं जा सकता। मृतक परिवार को न्याय, घायल को बेहतर उपचार और इस हादसे की जवाबदेही तय करना अब शासन-प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।









