रायपुर-बिलासपुर स्मार्ट सिटी के 1764 करोड़ के खर्च पर सवाल, EOW-ACB में शिकायत करेंगे मनोज सिंह ठाकुर

रायपुर। छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी (Smart City)प्रोजेक्ट में करीब 1764 करोड़ रुपये की राशि के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अधिवक्ता और कांग्रेस नेता मनोज सिंह ठाकुर ने इस मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे रायपुर स्थित EOW-ACB मुख्यालय में आपराधिक संज्ञान के लिए शिकायत पत्र सौंपने की घोषणा की है।

ठाकुर का कहना है कि केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के खर्च को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। उन्होंने सरकारी राशि के इस्तेमाल, निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

मनोज सिंह ठाकुर के मुताबिक, रायपुर और बिलासपुर में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कुल 1764 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान था। इसमें रायपुर के लिए 906 करोड़ और बिलासपुर के लिए 858 करोड़ रुपये शामिल हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रायपुर में केंद्र सरकार की ओर से जारी 453 करोड़ रुपये का पूरा खर्च दर्शाया गया है। वहीं, बिलासपुर में केंद्र से जारी 429 करोड़ रुपये में से 411 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है।

ठाकुर का सवाल है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति, गुणवत्ता जांच और भुगतान से जुड़े सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे हैं।

मनोज सिंह ठाकुर ने मांग की है कि दोनों शहरों में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कराए गए निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। इसके साथ ही थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट रिपोर्ट, उपयोगिता प्रमाणपत्र, टेंडर और ठेकेदारों को किए गए भुगतान की जांच हो।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि निर्माण कार्यों में देरी या गुणवत्ता संबंधी कमियों की स्थिति में संबंधित ठेकेदारों पर कितनी पेनाल्टी लगाई गई। यदि नियमों के उल्लंघन के बावजूद पेनाल्टी नहीं लगाई गई, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

मनोज सिंह ठाकुर ने बताया कि वे शुक्रवार को EOW-ACB मुख्यालय में शिकायत पत्र सौंपकर पूरे मामले में आपराधिक संज्ञान लेने और निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे।

उन्होंने कहा कि जनता के पैसों से चलने वाली योजनाओं में एक-एक रुपये का हिसाब होना चाहिए। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि जिन कार्यों के लिए भुगतान किया गया, वे वास्तव में पूरे हुए हैं या नहीं और उनकी गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं।
ठाकुर ने कहा है कि शिकायत के बाद भी मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो वे विशेष न्यायालय और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

उन्होंने अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नागरिकों और मीडियाकर्मियों से इस पहल में शामिल होने की अपील भी की है।
फिलहाल स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में वित्तीय अनियमितता के आरोपों की जांच होना बाकी है। संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों का पक्ष भी सामने आना शेष है। ऐसे में अब देखना होगा कि शिकायत मिलने के बाद EOW-ACB इस मामले में क्या कार्रवाई करती है।

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