लेंस डेस्क। साल 2026 का रसायन विज्ञान का नोबेल (Nobel)पुरस्कार फ्रांस के वैज्ञानिक हेनरी बी. कागन और जापान के केन्सो सोआई को दिया गया है। दोनों ने मिलकर अणुओं की एक पुरानी पहेली सुलझाई है, जो दवा बनाने में बहुत काम आ रही है।
कुछ अणु एक-दूसरे की आईने में दिखने वाली तस्वीर जैसे होते हैं। इन्हें मिरर इमेज अणु कहा जाता है। जैसे हमारे बाएं और दाएं हाथ लगभग एक जैसे दिखते हैं, लेकिन एक दूसरे की जगह नहीं ले सकते। वैज्ञानिक जब ऐसे अणु बनाते हैं तो अक्सर दोनों रूप एक साथ बन जाते हैं। दिक्कत यह है कि दवा में सिर्फ एक रूप ही फायदेमंद होता है। दूसरा रूप कम असरदार या नुकसानदायक भी हो सकता है इसलिए सिर्फ सही रूप बनाने का तरीका ढूंढना जरूरी था।
हेनरी बी. कागन ने 1980 के दशक में एक तरीका बताया। उन्होंने ऐसी रासायनिक प्रक्रिया तैयार की जिसमें दोनों रूप बराबर नहीं बनते जिस रूप की जरूरत होती है, वही ज्यादा मात्रा में बनने लगता है। इससे वैज्ञानिक जरूरत के मुताबिक सही अणु चुनकर बना सकते हैं।
केन्सो सोआई ने इस काम को आगे बढ़ाया। उन्होंने एक ऐसी प्रक्रिया बनाई जिसमें एक बार सही तरह का अणु बनने के बाद वह खुद अपने जैसे और अणु बनाने में मदद करने लगता है। शुरुआत में अगर एक रूप थोड़ा ज्यादा हो, तो धीरे-धीरे वह बहुत ज्यादा हो जाता है। उनके 1995 के प्रयोग में शुरुआत का 2 प्रतिशत फर्क बढ़कर 87 प्रतिशत तक पहुंच गया। बाद में उन्होंने इसे और बेहतर किया, जिसमें सही अणु की मात्रा 99.99 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
यह खोज दवा उद्योग के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इससे सही और सुरक्षित दवाएं बनाना आसान हो गया है। दोनों वैज्ञानिकों को दिसंबर में स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मेडल, डिप्लोमा और करीब 11.5 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी।











