लेंस डेस्क । रूस के साइबेरिया इलाके में एक लैब टेक्नीशियन की संदिग्ध मौत के बाद इलाके में भय का माहौल बन गया है। एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करने वाली महिला दर्या शिपिलोवा की मौत के बाद आसपास के इलाकों में सुरक्षा उपाय तेज कर दिए गए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, लैब में जांच के दौरान एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी जिसमें जिंदा बैक्टीरिया थे। इससे महिला संक्रमित हो गईं। हालांकि रूसी स्वास्थ्य विभाग ‘रोस्पोट्रेबनादजोर’ का कहना है कि उनकी मौत प्लेग से नहीं बल्कि अज्ञात निमोनिया से हुई। विभाग का दावा है कि जांच में कोई खतरनाक रोगाणु नहीं मिला।
वहीं पड़ोसी राज्य बुरियाटिया के प्रमुख एलेक्सी त्सिदेनोव ने प्लेग की आशंका जताई है। पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी गेनेडी ओनिश्चेंको का कहना है कि ठंड के मौसम में संक्रमण फैलने की संभावना कम है।
अस्पताल बंद, 200 लोग निगरानी में
मंगोलियाई सीमा के पास शेलेखोव कस्बे के अस्पताल में महिला का इलाज चल रहा था। वहां के पूरे स्टाफ को क्वारंटीन कर दिया गया है। करीब 200 लोग निगरानी में हैं। नए मरीजों की भर्ती रोक दी गई है और कुछ अस्पताल बंद कर दिए गए हैं।
गवर्नर इगोर कोब्जेव ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। नजदीकी एल्युमिनियम प्लांट में मास्क लगाना जरूरी कर दिया गया है। मेयर मैक्सिम मोदिन के अनुसार पिछले 10 दिनों में संस्थान के किसी और कर्मचारी में संक्रमण नहीं मिला। संपर्क में आए लोगों में सिर्फ कोविड और राइनोवायरस के कुछ मामले सामने आए हैं।
अमेरिका ने मांगी पूरी जानकारी
अमेरिकी विदेश विभाग ने इस मामले पर नजर रखने की बात कही है। अमेरिका ने रूस से सही जानकारी साझा करने की मांग की है। इस रिसर्च संस्थान में करीब 95 वैज्ञानिक काम करते हैं। यह संस्थान साइबेरिया और सुदूर पूर्वी इलाकों में खतरनाक संक्रमणों की रोकथाम का काम करता है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि वे इस मामले पर नजर रख रहे हैं लेकिन फिलहाल ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं लगती।
मध्य एशियाई देशों में अलर्ट
रूस में प्लेग फैलने की आशंका से कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान ने अपनी सीमाओं पर स्वास्थ्य जांच सख्त कर दी है। किर्गिस्तान ने सभी सीमा चौकियों पर हाई अलर्ट जारी किया है। यात्रियों, वाहनों और सामान की सख्ती से जांच हो रही है।
उज्बेकिस्तान ने रूस और विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के आधार पर निगरानी बढ़ा दी है। कजाकिस्तान का स्वास्थ्य मंत्रालय कह रहा है कि संक्रमण फैलने का खतरा बहुत कम है, फिर भी सीमा पर थर्मल स्क्रीनिंग जारी है।
पहले भी हो चुके हैं लैब लीक के मामले
दुनिया में पहले भी लैब से खतरनाक वायरस लीक होने के कई मामले सामने आ चुके हैं। 1967 में जर्मनी में मारबर्ग वायरस, 1977 में रूस-चीन में इन्फ्लूएंजा और 1978 में ब्रिटेन में चेचक का लीक होना प्रमुख उदाहरण हैं। 2019 में वुहान लैब से कोरोना वायरस लीक होने का दावा भी किया जाता रहा है।









