रायपुर में सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट)(SUCI) ने एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन पार्टी की केंद्रीय कमेटी के आह्वान पर किया गया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करने, एसआईआर प्रक्रिया तत्काल रोकने और मतदाता सूची से हटाए गए नामों को दोबारा जोड़ने की मांग की।
प्रदर्शन के बाद कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया। पार्टी का दावा है कि एसआईआर के कारण देशभर में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में करीब 25 लाख लोगों के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया गया है। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई गई।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए पार्टी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में एसआईआर की प्रक्रिया उन राज्यों में कराई गई, जहां चुनाव होने वाले थे। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। वक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम हटाने के काम में भाजपा और चुनाव आयोग की मशीनरी के बीच मिलीभगत रही, जिससे भाजपा को चुनावी लाभ पहुंचा। हालांकि, ये आरोप पार्टी की ओर से लगाए गए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मतदाता सूची में नाम होना प्रत्येक पात्र नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है और किसी भी प्रक्रिया के कारण वास्तविक मतदाता अपने मताधिकार से वंचित नहीं होना चाहिए।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती की मांग
पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि एसआईआर से जुड़े फैसलों में मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों और असहमति को नजरअंदाज किया। इसे उन्होंने चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के कामकाज के लिए चिंताजनक बताया। प्रदर्शन में मांग की गई कि हटाए गए मतदाताओं के नामों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें मतदाता सूची में बहाल किया जाए और एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए। साथ ही केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए उसकी आलोचना की गई। प्रदर्शन में केंद्रीय कमेटी के सदस्य सहित राज्य संगठन समिति के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल रहे। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने और शासन-प्रशासन में लोकतांत्रिक मूल्यों के पालन की प्रतिबद्धता सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।










