रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी (Coal Levi) घोटाले में EOW-ACB ने सोमवार को रायपुर की विशेष अदालत में करीब 9500 पन्नों का छठा पूरक चालान पेश किया। चालान में 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें कांग्रेस के नेता, विधायक, पूर्व विधायक, आईएएस अधिकारी और कारोबारियों से जुड़े लोग शामिल हैं। जांच एजेंसी ने कथित अवैध वसूली से लेकर रकम के इस्तेमाल और संपत्तियों में निवेश तक का ब्योरा चालान में पेश किया है।
जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच वसूली का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक कथित कोल लेवी सिंडिकेट जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच सक्रिय था। आरोप है कि इस दौरान कोयला परिवहन से जुड़े लोगों से प्रति टन 25 रुपये की दर से रकम वसूली जाती थी। बाद में जनवरी 2022 से आयरन पैलेट के परिवहन पर भी 100 रुपये प्रति टन की कथित वसूली शुरू की गई।
ई-परमिट व्यवस्था में बदलाव को बनाया आधार
EOW के अनुसार जुलाई 2020 में ई-परमिट व्यवस्था में बदलाव किया गया था। इसके बाद कोयले की डिलीवरी के लिए जिला खनिज अधिकारी की मैन्युअल मंजूरी जरूरी हो गई। जांच एजेंसी का आरोप है कि इसी व्यवस्था का इस्तेमाल परिवहनकर्ताओं पर दबाव बनाने और कथित अवैध वसूली के लिए किया गया।
राजीव भवन तक 104.20 करोड़ पहुंचाने का दावा
छठे पूरक चालान में राम गोपाल अग्रवाल से जुड़ी 32 डायरी प्रविष्टियों का उल्लेख किया गया है। इन प्रविष्टियों में ‘भवन’ और ‘C PARTY’ जैसे शब्दों के साथ करीब 104.20 करोड़ रुपये का हिसाब होने का दावा है।
EOW के अनुसार जांच में यह रकम रायपुर स्थित राजीव भवन तक पहुंचाए जाने और पार्टी से जुड़े कामों में इस्तेमाल किए जाने के संकेत मिले हैं। यह आरोप जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों और डायरी प्रविष्टियों पर आधारित है।
देवेंद्र यादव से जुड़ी करीब 3 करोड़ की प्रविष्टियां
भिलाई नगर विधायक देवेंद्र सिंह यादव के संबंध में 11 प्रविष्टियों का उल्लेख चालान में किया गया है। इनमें करीब 3 करोड़ रुपये का हिसाब होने की बात कही गई है। EOW का आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल खैरागढ़ उपचुनाव सहित राजनीतिक गतिविधियों और व्यक्तिगत जरूरतों में किया गया।
विनोद तिवारी और रामप्रताप सिंह का भी नाम
कांग्रेस नेता विनोद तिवारी से जुड़ी 22 प्रविष्टियों में करीब 2.12 करोड़ रुपये और रामप्रताप सिंह से जुड़ी 25 प्रविष्टियों में करीब 2.93 करोड़ रुपये दर्ज होने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक इन रकमों का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों, होर्डिंग, मीडिया मैनेजमेंट, वाहनों और अन्य कामों में किया गया।
चंद्रदेव राय से जुड़ी रकम और आभूषण
पूर्व विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय से जुड़ी प्रविष्टियों में करीब 49.50 लाख रुपये का उल्लेख है। EOW के अनुसार रकम का इस्तेमाल चुनावी गतिविधियों से जुड़ा था। चालान में सोने के आभूषण से संबंधित लेन-देन का भी जिक्र किया गया है।
IAS जयप्रकाश मौर्य पर एक करोड़ रुपये लेने का आरोप
छठे पूरक चालान में आईएएस अधिकारी जयप्रकाश मौर्य की भूमिका भी सामने रखी गई है। वह भौमिकी एवं खनिकर्म विभाग के संचालक रहे हैं। EOW के अनुसार उनसे जुड़ी दो प्रविष्टियों में करीब एक करोड़ रुपये का उल्लेख है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि मौर्य ने कथित तौर पर नकद रकम ली और पैलेट उद्योगों से सिंडिकेट को 100 रुपये प्रति टन की दर से रकम देने के लिए दबाव बनाने में भूमिका निभाई। इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद होगा।
जमीन और दूसरी संपत्तियों में निवेश का आरोप
चालान में कथित अवैध रकम को जमीन, फ्लैट और दूसरी संपत्तियों में लगाए जाने का भी उल्लेख है। EOW ने पियूष कुमार साहू और अनुराग चौरसिया समेत कुछ लोगों पर कथित बेनामी संपत्तियों में निवेश से जुड़े आरोप लगाए हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार शेल कंपनियों, फर्जी लोन और दूसरे वित्तीय माध्यमों के जरिए रकम को वैध दिखाने की कोशिश की गई। संपत्ति दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
डायरी और WhatsApp चैट से खुले लेन-देन के तार
EOW ने जांच में जब्त हस्तलिखित डायरियों, WhatsApp चैट, बैंक स्टेटमेंट, फॉरेंसिक रिपोर्ट और संपत्ति दस्तावेजों को अहम साक्ष्य बताया है। परिवहनकर्ताओं और अधिकारियों के बयान भी जांच में शामिल किए गए हैं।
जांच एजेंसी के मुताबिक अलग-अलग WhatsApp ग्रुप और कोडवर्ड के जरिए रकम के लेन-देन का हिसाब रखा जाता था। जिलों से रकम रायपुर लाने और फिर अलग-अलग लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था होने का भी आरोप है।
सूर्यकांत तिवारी को मुख्य सूत्रधार बताया
EOW ने सूर्यकांत तिवारी को कथित सिंडिकेट का प्रमुख सूत्रधार बताया है। जांच के मुताबिक उसके संपर्कों और प्रभाव का इस्तेमाल सरकारी व्यवस्था में दबाव बनाने और वसूली का नेटवर्क चलाने के लिए किया गया।
आरोप है कि जिलों से जुटाई गई रकम रायपुर में अलग-अलग स्थानों पर लाई जाती थी। इसके बाद रकम की गिनती और वितरण किया जाता था।
12 लोगों को बनाया आरोपी
छठे पूरक चालान में राम गोपाल अग्रवाल, देवेंद्र सिंह यादव, चंद्रदेव प्रसाद राय, जयप्रकाश मौर्य, विनोद तिवारी, रामप्रताप सिंह, पियूष कुमार साहू, जोगेंदर सिंह, अनुराग चौरसिया, दीपेश टांक, सुनील कुमार अग्रवाल और राहुल मिश्रा के नाम शामिल हैं।
पहले पांच पूरक चालान हो चुके हैं पेश
कोल लेवी मामले में EOW पहले एक मुख्य चालान के अलावा पांच पूरक चालान पेश कर चुकी है। अब छठे पूरक चालान के जरिए जांच एजेंसी ने अतिरिक्त आरोपियों, वित्तीय लेन-देन और कथित संपत्ति निवेश से जुड़े दस्तावेज अदालत में रखे हैं। मामले में आगे की जांच जारी रहने की बात कही गई है।
आरोपों पर अदालत में होना है फैसला
इस पूरे मामले में EOW और ACB की ओर से लगाए गए आरोप अभी अभियोजन पक्ष के आरोप हैं। आरोपियों की कानूनी जिम्मेदारी अदालत में साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के बाद तय होगी। इसलिए चालान में दर्ज दावों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
कोल लेवी घोटाले में 9500 पन्नों का छठा पूरक चालान, राजीव भवन तक 104 करोड़ पहुंचने का दावा
By लेंस न्यूज
🗓️ Published: October 6, 2026 12:42 am | 🔄 Updated: October 6, 2026 1:04 am










