रायपुर। छत्तीसगढ़ के अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों की पेंशन (pension) का मामला अब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तक पहुंच गया है। रायपुर सांसद और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उच्च शिक्षा विभाग के 1 सितंबर 2026 के आदेश को निरस्त करने की मांग की है। अग्रवाल ने पत्र में कहा है कि प्रदेश के अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों में वर्षों तक सेवा देने वाले रिटायर्ड प्राध्यापकों और कर्मचारियों को करीब 40 वर्षों से पेंशन और दूसरे सेवानिवृत्ति लाभ मिलते रहे हैं। 12 अक्टूबर 2010 के विभागीय आदेश के आधार पर संबंधित कर्मचारियों की पेंशन और ग्रेच्युटी की गणना की जा रही थी। लेकिन उच्च शिक्षा विभाग ने 1 सितंबर 2026 को नया आदेश जारी कर इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। सांसद ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए पुरानी व्यवस्था जारी रखने की मांग की है।
70, 80 और 90 साल से ज्यादा उम्र के पेंशनर भी प्रभावित
बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि इस फैसले से 400 से ज्यादा सेवानिवृत्त प्राध्यापक और कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं। इनमें कई पेंशनर 70, 80 और 90 साल से ज्यादा उम्र के हैं। जीवन के इस पड़ाव में उनके रोजमर्रा के खर्च, दवाइयों और इलाज जैसी जरूरतें काफी हद तक पेंशन पर निर्भर हैं। अग्रवाल का कहना है कि चार दशकों से चली आ रही पेंशन व्यवस्था को अचानक खत्म करने से बुजुर्ग और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सामने आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों ने अपना जीवन शिक्षण व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में लगाया है, इसलिए उनकी वर्षों से चली आ रही पेंशन व्यवस्था को अचानक समाप्त करना उनके लिए परेशानी बढ़ाने वाला फैसला है।
1 सितंबर के आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से पूरे मामले की मानवीय और लोकहित के नजरिए से समीक्षा करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि उच्च शिक्षा विभाग की ओर से 1 सितंबर 2026 को जारी आदेश पर तत्काल रोक लगाई जाए या उसे निरस्त किया जाए। इसके साथ ही राज्य के अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के पात्र सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों को पहले की तरह पेंशन और ग्रेच्युटी देने की व्यवस्था जारी रखी जाए। अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग को जरूरी निर्देश देने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा फैसला प्रदेश के वरिष्ठ और सेवानिवृत्त शिक्षकों तथा कर्मचारियों के हित में संवेदनशील और न्यायसंगत कदम होगा।










